शेखर रंजन देबनाथ ने कहा कि मामले में कुल 147 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल सात गवाहों की गवाही पूरी हो पाई है। उन्होंने इसके लिए सीबीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि एजेंसी ने अपना काम ठीक से नहीं किया। इसी वजह से अदालत में सुनवाई तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रही है।
संदीप घोष को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने पर पीड़िता के पिता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना चुका है। सीबीआई ने अपना काम ठीक से नहीं किया है, यही वजह है कि अदालती सुनवाई तेजी से नहीं हो रही है। आरोपी को दो साल तक जेल में रखा गया, लेकिन उसके बाद उसे जमानत दे दी गई।
बता दें कि अगस्त 2024 में जूनियर डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के बाद, आरजी कर अस्पताल में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की खबरें सामने आई थीं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान संदीप घोष आरजी कर के प्रिंसिपल थे।
कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद, संदीप घोष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। शुक्रवार को राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने मुकदमे की धीमी प्रगति पर गौर किया।



