चीन के तियानजिन में सोमवार (1 सितंबर)को संपन्न हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में जारी तियानजिन घोषणा ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले में 22 अप्रैल को 26 लोगों की जान गई थी। घोषणा पत्र में सदस्य देशों के नेताओं ने पीड़ितों के परिवारों और घायलों के प्रति गहरी संवेदना और शोक व्यक्त किया। साथ ही कहा गया कि ऐसे हमलों के अपराधियों, आयोजकों और प्रायोजकों को हर हाल में न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए।
SCO की इस सामूहिक निंदा को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की उपस्थिति के कारण और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और सीमा पार से घुसपैठ कराने के आरोप लगाता रहा है।
तियानजिन घोषणा में कहा गया, “सदस्य राष्ट्र आतंकवाद के हर रूप और स्वरूप की कड़ी निंदा करते हैं। हम यह दोहराते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे मानदंड स्वीकार्य नहीं होंगे। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील है कि वह आतंकवाद से मुकाबला करे, जिसमें सीमा पार से आतंकियों की आवाजाही पर रोक भी शामिल है।”
संगठन ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और साफ किया कि किसी भी राजनीतिक या आर्थिक हित साधने के लिए आतंकवादी समूहों का इस्तेमाल अस्वीकार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिखर सम्मेलन में यह घोषणा न केवल भारत के रुख को मजबूती देती है बल्कि पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक रूप से असहज स्थिति भी पैदा करती है।
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