चीन के तियानजिन में आज (31 अगस्त) से शुरू हो रहे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से ठीक पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला है। पुतिन ने कहा कि किसी भी तरह के भेदभावपूर्ण प्रतिबंध स्वीकार नहीं किए जा सकते, क्योंकि ये न केवल देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बाधित करते हैं बल्कि वैश्विक सहयोग की भावना के भी खिलाफ हैं।
पुतिन ने जोर देते हुए कहा कि रूस वैश्विक मुद्दों के समाधान के लिए ब्रिक्स समूह को और मजबूत बनाने के पक्ष में है। उन्होंने कहा, “किसी भी प्रकार के भेदभावपूर्ण प्रतिबंध स्वीकार नहीं किए जा सकते। ऐसे प्रतिबंध किसी भी देश के आर्थिक विकास में बाधा डालते हैं और इन्हें कोई भी राष्ट्र कतई स्वीकार नहीं कर सकता।”
रूसी राष्ट्रपति ने अपने बयान में एक अधिक न्यायसंगत और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, एससीओ की असली ताकत इसके बुनियादी सिद्धांतों में है – संस्थापक दर्शन के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता, समान सहयोग के लिए खुलापन, किसी तीसरे पक्ष को निशाना न बनाना और प्रत्येक राष्ट्र की राष्ट्रीय विशेषताओं का सम्मान। पुतिन ने कहा कि ये मूल्य अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका पर आधारित एक संतुलित वैश्विक ढांचे को आकार देने में मदद करते हैं।
सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन ने विश्वास जताया कि तियानजिन शिखर सम्मेलन एससीओ के इतिहास में एक अहम पड़ाव साबित होगा। उन्होंने कहा, “हमारे संयुक्त प्रयासों से हम एससीओ को नई गति देंगे और समय की मांग के अनुसार इसका आधुनिकीकरण करेंगे।”
रूस ने चीन की अध्यक्षता के तहत तय प्राथमिकताओं का पूरा समर्थन किया है। इन प्राथमिकताओं में संगठन को मजबूत करना, सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना और वैश्विक मंच पर एससीओ की भूमिका को और प्रखर करना शामिल है। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक मंच पर होंगे। ऐसे में अमेरिका और पाकिस्तान सहित पूरी दुनिया की नजरें इस बहुपक्षीय शिखर सम्मेलन पर टिकी हुई हैं।
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