विश्लेषक के अनुसार,“बॉन्ड यील्ड में कमी से जोखिम लेने की ट्रेंड में सुधार के चलते भारतीय शेयर बाजार सप्ताह के अंत में बढ़त के साथ बंद हुए। फेड, ईसीबी और बैंक ऑफ जापान ने उम्मीद के मुताबिक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन मुद्रास्फीति पर उनकी निरंतर सतर्कता ने शीघ्र मौद्रिक नरमी की उम्मीदों पर लगाम लगाई।”
बेहतर मैक्रो परिस्थितियों ने व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित किया, जिसमें मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों ने लार्ज-कैप शेयरों से बेहतर प्रदर्शन किया। सप्ताहांत आते-आते माहौल सतर्क हो गया क्योंकि पश्चिम एशिया में नए सिरे से तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे व्यापक बाजार में मुनाफावसूली शुरू हो गई, हालांकि बेंचमार्क ने अपनी साप्ताहिक बढ़त बरकरार रखी।
सप्ताह के दौरान फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में अच्छी तेजी रही, जिसका मुख्य कारण कंपनियों के सकारात्मक नतीजे रहे। वहीं, बॉन्ड यील्ड में नरमी आने से रियल एस्टेट शेयरों को फायदा मिला। इनपुट कॉस्ट कम होने की उम्मीदों से मेटल, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों को लाभ हुआ, जबकि सीमेंट और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में सुस्ती रही।
इस सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 6,304.67 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,109.79 करोड़ रुपए के शेयरों की खरीदारी की।
इस सप्ताह मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 में 2.69 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
सप्ताह के अंत में ब्रेंट क्रूड की कीमत 117 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही। अब सबकी नजरें ओपीईसी प्लस की आगामी समीक्षा पर टिकी हैं, जिससे सप्लाई को लेकर कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है।
