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सीजीएचएस घोटाले में सात दोषियों को दो-दो साल की सजा मिली!

सीबीआई ने सितंबर 2006 में 1970-1980 के दौरान पंजीकृत निष्क्रिय या बंद हो चुकी सहकारी समूह आवास समितियों के धोखाधड़ीपूर्ण पुनरुद्धार के संबंध में यह मामला दर्ज किया था।

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कोर्ट ने ‘लोक प्रिय को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी’ (सीजीएचएस) को धोखाधड़ी से दोबारा शुरू करने से जुड़े मामले में सात दोषियों को सजा सुनाई है। इनमें दो सरकारी कर्मचारी को-ऑपरेटिव सोसाइटीज के तत्कालीन रजिस्ट्रार आर.के. श्रीवास्तव और तत्कालीन असिस्टेंट रजिस्ट्रार पी.एन. मनचंदा और के.के. वाधवा, अनिल कुमार, सुनील कुमार, देवेंद्र पाल सिंह और रवि सलूजा शामिल हैं।

सरकारी कर्मचारियों को दो साल की कठोर कैद और हर एक पर 75,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जबकि अन्य व्यक्तियों को धोखाधड़ी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से जुड़े अपराधों के लिए जुर्माने के साथ-साथ दो साल की कठोर कैद की सजा सुनाई गई है।

सीबीआई ने सितंबर 2006 में 1970-1980 के दौरान पंजीकृत निष्क्रिय या बंद हो चुकी सहकारी समूह आवास समितियों के धोखाधड़ीपूर्ण पुनरुद्धार के संबंध में यह मामला दर्ज किया था।

जांच में यह पता चला कि आरोपियों ने लोकप्रिय सीजीएचएस को धोखाधड़ी से पुनर्जीवित करने के लिए सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारियों के साथ आपराधिक साजिश रची थी। साजिश के तहत आरोपियों ने जाली दस्तावेजों का उपयोग करके दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से भूमि का आवंटन प्राप्त किया।

जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने दिल्ली की सक्षम अदालत में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने सुनवाई के बाद 14 जुलाई को आरोपियों को दोषी ठहराया और 30 अगस्त को सजा सुनाई।

इसके पहले लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने रिश्वत के एक मामले में रायबरेली दरियापुर जंक्शन रेलवे स्टेशन के तत्कालीन गुड्स क्लर्क दुर्गेश बहादुर सिंह को दोषी ठहराते हुए चार साल की जेल और 10,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी।

सीबीआई ने 13 अक्टूबर 2017 को मैसर्स आरडी सीमेंट इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ के डायरेक्टर की शिकायत पर यह मामला दर्ज किया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपी गुड्स क्लर्क दुर्गेश बहादुर सिंह ने कंपनी पर लगाए गए 1,26,000 रुपए के डेमरेज चार्ज (देरी पर शुल्क) को काफी कम करने के लिए 60,000 रुपए की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी को 7,200 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था।
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