अभिनेत्री ने आईएएनएस से बातचीत में बताया, “एक एक्टर के तौर पर आपको यह अच्छी तरह पता होना चाहिए कि कैमरे के सामने कब किरदार में आना है (ऑन होना) और शॉट खत्म होने पर कब उससे बाहर निकलना है (ऑफ होना)।
आज के समय में बढ़ते टॉक्सिक अटैचमेंट और जुनूनी व्यवहार पर बात करते हुए अभिनेत्री ने बताया कि सोशल मीडिया आने से पहले भी समाज में इस तरह के जुनूनी लोग मौजूद थे। उन्होंने कहा, “फर्क बस इतना है कि अब सब कुछ बहुत जल्दी दिखाई देने लगता है क्योंकि हर किसी के पास फोन है और जानकारी तुरंत फैल जाती है।
अपनी बात को रखते हुए अभिनेत्री ने फिल्म के निर्देशक पीटर की बात को याद करते हुए कहा, “पीटर सर ने एक बार कहा था, हर इंसान के अंदर एक फरिश्ता और एक शैतान, दोनों होते हैं। इनमें से कौन सा पहलू कितना बाहर आता है, यह पूरी तरह से उस इंसान पर निर्भर करता है।”
अभिनेत्री ने किरदार के भावनात्मक बोझ से पूरी तरह मुक्त होने को जरूरी बताते हुए बताया कि काम के दौरान आप मानसिक रूप से उसी दुनिया में रहते हैं। कुछ दिन बहुत भारी होते हैं, तो कुछ अच्छे, लेकिन काम खत्म होते ही उस काल्पनिक दुनिया से बाहर निकलना एक कलाकार के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।
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