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Thursday, October 15, 2026
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बकासन में संतुलन बिगड़ रहा है? इस तरह करें अभ्यास, कुछ दिन में बन जाएगी पकड़!

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि बकासन करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर सीधे खड़े होकर या स्क्वाट की स्थिति में आएं।

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बकासन योग का एक कठिन लेकिन बेहद लोकप्रिय आसन है। इसे अंग्रेजी में क्राउ पोस कहा जाता है। शुरुआत में इसे करने में थोड़ा मुश्किल लग सकता है, क्योंकि इसमें शरीर का संतुलन हाथों पर बनाना होता है। लेकिन सही तकनीक और नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे इस आसन पर पकड़ बनाई जा सकती है। बकासन करते समय शरीर की स्थिति के साथ-साथ सांस और संतुलन पर ध्यान देना भी जरूरी है।

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि बकासन करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर सीधे खड़े होकर या स्क्वाट की स्थिति में आएं। अब दोनों हथेलियों को कंधों की चौड़ाई के आसपास जमीन पर मजबूती से टिकाएं। उंगलियों को अच्छी तरह फैलाएं, ताकि हथेलियों का आधार मजबूत रहे और शरीर का संतुलन बनाने में आसानी हो।

अब धीरे-धीरे घुटनों को ऊपर उठाकर उन्हें बगल यानी ऊपरी बाजुओं के पास टिकाएं। इसके बाद कूल्हों को ऊपर की ओर उठाएं और शरीर का भार धीरे-धीरे पैरों से हटाकर हाथों की तरफ लाएं। इस दौरान कोशिश करें कि टेलबोन अंदर की ओर रहे और शरीर बहुत ज्यादा आगे या पीछे न झुके।

अब पैरों को जमीन से ऊपर उठाने की कोशिश करें। शुरुआत में एक-एक पैर उठाकर अभ्यास किया जा सकता है। जब संतुलन बनने लगे, तो दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठाएं। भुजाओं को जितना संभव हो सीधा रखें और कंधों को स्थिर रखें।

बकासन में दृष्टि सामने की ओर रखना काफी महत्वपूर्ण है। नीचे देखने से शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है। उंगलियों को फैलाकर हथेलियों के जरिए जमीन पर मजबूत पकड़ बनाएं। पैरों को भी ढीला न छोड़ें, बल्कि पंजों को तानकर पैरों को सक्रिय रखें।

इस आसन के दौरान सांस को रोकने के बजाय सामान्य और नियंत्रित तरीके से सांस लेते रहें। शुरुआत में कुछ सेकंड तक संतुलन बनाना ही पर्याप्त है। अभ्यास बढ़ने के साथ धीरे-धीरे इस स्थिति में ज्यादा देर तक रहने की कोशिश की जा सकती है।

बकासन शरीर के संतुलन और एकाग्रता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसके अभ्यास से कलाई, हाथ, कंधे और बाजुओं की मांसपेशियों पर काम होता है। साथ ही पेट और कोर की मांसपेशियां भी सक्रिय रहती हैं। नियमित अभ्यास से शरीर पर नियंत्रण और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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