सुचिका सिंगापुर की हुई हून टून के खिलाफ सेमीफाइनल में फाइट पर दबदबा बनाने के बावजूद हार के फैसले से निराश नजर आईं। फैसले के बाद उन्होंने आर्बिट्रेशन के लिए विरोध जताया। आर्बिट्रेशन के दौरान, जजों ने मुकाबले की समीक्षा की और इसे ड्रॉ घोषित कर दिया।
एशियन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स एसोसिएशन (एएमएमए) के नियमों के अनुसार, ड्रॉ की स्थिति में कम वजन वाली फाइटर को विजेता घोषित किया जाता है। सुचिका ने इस विवादित फैसले और आर्बिट्रेशन के बाद मेडल गंवाने पर नाराजगी जताई और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
सुचिका ने ‘आईएएनएस’ के साथ खास बातचीत में कहा, “मुझे लगता है कि उसे ही जीतना था, क्योंकि फेडरेशन सिंगापुर का है। अगर मेरा वजन थोड़ा कम भी होता, तो भी फैसला मेरे खिलाफ ही होता। उन्होंने सब कुछ वजन पर डाल दिया। उन्होंने अपने देश के बारे में सोचा, खिलाड़ी के बारे में नहीं। हर जगह भ्रष्टाचार है; मैंने आज यहां भी इसे देखा है।”
सुचिका ने दावा किया कि वह फाइट के बाद रेफरी के फैसले से सहमत नहीं थीं, क्योंकि मुकाबले में उनका ही दबदबा था। उन्होंने कहा, “मैंने अपना शत प्रतिशत दिया। मैं उस फैसले से भी सहमत नहीं हूं जो उनके पक्ष में गया, क्योंकि मुझे लगा कि मैं जीतने वाली हूं।
सुचिका ने बताया, “मैं मूलत: उत्तराखंड से हूं, मगर दिल्ली में पली-बढ़ी और शादी हरियाणा में हुई। मेरे मायके में मम्मी-पापा, हम 4 बहनें और 1 भाई है। ससुराल में सासू मां और एक भैया हैं, जो काफी सपोर्ट करते हैं। मेरी शादी को 6-8 साल हो गए हैं, उन्होंने किसी चीज के लिए कभी रोका नहीं है। मुझे दोनों परिवार से भरपूर सपोर्ट मिला है। मैं यह मेडल अपने परिवार को सपोर्ट करती हूं।”
विरोध के बाद, सुचिका के कोच निखिल कुंदर ने भी आर्बिट्रेशन के विवादित फैसले पर बात की। कुंदर ने कहा कि दोबारा जांच में कोई विजेता नहीं निकला, जिससे नतीजा टाई रहा और वजन का नियम लागू हो गया।



