भारत के रत्न एवं आभूषण उद्योग ने शनिवार (7 फरवरी)को घोषित भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का जोरदार स्वागत किया है। इस समझौते के तहत भारतीय रत्न और हीरों पर अमेरिकी शुल्क को शून्य कर दिया गया है, जिससे उद्योग जगत का मानना है कि भारतीय निर्यातकों को अमेरिका के विशाल बाजार तक अभूतपूर्व पहुंच मिलेगी। हालांकि, तैयार आभूषणों (फिनिश्ड ज्वेलरी) पर फिलहाल 18 प्रतिशत शुल्क बना रहेगा।
मुंबई सहित देश के प्रमुख जेम्स एंड ज्वेलरी हब से जुड़े उद्योग नेताओं ने कहा कि यह समझौता भारतीय कारोबारियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करेगा, खासकर उन छोटे और मझोले उद्यमों (SMEs) के लिए जो इस सेक्टर की रीढ़ माने जाते हैं।
ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने इस समझौते को ऐतिहासिक करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का आभार जताया। उन्होंने कहा,
“यह ऐतिहासिक सफलता हमारी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करती है, मार्जिन बढ़ाती है और यह सुनिश्चित करती है कि हमारे कारीगरों की रचनाएं उचित कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचें। हालांकि आभूषणों पर अभी भी 18 प्रतिशत शुल्क बना हुआ है, लेकिन रत्न और हीरों में मिली राहत एक बेहद सशक्त कदम है, जो भारतीय कारीगरी को वैश्विक उत्कृष्टता के प्रतीक के रूप में स्थापित करती है।”
GJC के उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता ने इस फैसले को “ऐतिहासिक शून्य-शुल्क मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा कि रत्न और हीरों पर शुल्क हटना विशेष रूप से उन SMEs और पारिवारिक व्यवसायों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा, जो वर्षों से सीमित मार्जिन और ऊंचे टैरिफ के दबाव में काम कर रहे थे। गुप्ता के अनुसार, “SMEs और पारिवारिक व्यवसाय अब अमेरिकी बाजार में समान शर्तों पर प्रवेश कर सकेंगे, जिससे निर्यात बढ़ेगा, राजस्व मजबूत होगा और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही तैयार आभूषणों पर 18 प्रतिशत शुल्क बना हुआ है, लेकिन यह समझौता आगे चलकर व्यापक अवसरों की नींव रखता है और लॉजिस्टिक्स, डिजाइन और रिटेल जैसे सहायक उद्योगों में मल्टीप्लायर इफेक्ट पैदा करेगा।
उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि अमेरिका भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में हीरों और रत्नों पर शून्य शुल्क से भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे, जिससे ऑर्डर बढ़ने और उत्पादन में तेजी आने की संभावना है। इससे न केवल निर्यात में वृद्धि होगी, बल्कि कारीगरों और श्रमिकों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। कुल मिलाकर, इस अंतरिम व्यापार समझौते को भारतीय जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर के लिए एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत की वैश्विक बाजारों में स्थिति को और मजबूत कर सकता है।
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