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Wednesday, October 14, 2026
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सरकार ने पेप्ट्रिस के एआई आधारित दवा विकास कार्यक्रम को 86 करोड़ मंजूर किए!

इस परियोजना के लिए सरकार ने रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) फंड के तहत 86 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता मंजूर की है।

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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत आने वाले टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (टीडीबी) ने एआई आधारित दवा विकास कार्यक्रम के लिए पेप्ट्रिस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना के लिए सरकार ने रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) फंड के तहत 86 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता मंजूर की है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, ‘वीगर: एडवांसिंग एआई-डिस्कवर्ड मॉलीक्यूल्स फ्रॉम बेंच टू क्लीनिक ‘ नामक इस परियोजना की कुल लागत 172 करोड़ रुपए है, जिसके तहत एआई की मदद से खोजी गई चार संभावित दवाओं को प्री-क्लिनिकल विकास, वैलिडेशन और क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी के जरिए टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (टीआरएल)-4 से टीआरएल-6 तक पहुंचाया जाएगा। वित्तीय सहायता ऑप्शनली कन्वर्टिबल डेट (ओसीडी) के रूप में दी जाएगी।

मंत्रालय ने कहा कि कंप्यूटर-आधारित खोजों को वास्तविक दवा उम्मीदवारों में बदलने के लिए व्यापक प्रयोगशाला परीक्षण, प्री-क्लिनिकल अध्ययन और क्लिनिकल विकास की जरूरत होती है। पेप्ट्रिस का वीगर कार्यक्रम इसी महत्वपूर्ण अंतर को पाटने का प्रयास करेगा।

यह कार्यक्रम उन बीमारियों पर केंद्रित है जहां अभी भी प्रभावी उपचार की जरूरत बनी हुई है। परियोजना में ‘पीईपीआर111’ (न्यूरोमस्कुलर विकार और कैंसर), ‘पीईपीआरएक्स101’ (बाल झड़ने की समस्या या एलोपेसिया), ‘पीईपीआर202’ (न्यूरोपैथी) और ‘पीईपीआर112’ (ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी) जैसी चार दवा उम्मीदवार शामिल हैं।

तीन वर्ष की इस परियोजना में उन्नत प्री-क्लिनिकल अध्ययन, इन्वेस्टिगेशनल न्यू ड्रग (आईएनडी) से संबंधित परीक्षण, फॉर्मूलेशन विकास, क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी और शुरुआती गतिविधियां शामिल होंगी, जो नियामकीय और वैज्ञानिक आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित की जाएंगी।

सरकार का मानना है कि यह परियोजना एआई आधारित खोज और क्लिनिकल विकास के बीच की दूरी को कम करने के साथ भारत की बायोटेक्नोलॉजी, फार्मास्यूटिकल्स और एआई-सक्षम हेल्थकेयर नवाचार क्षमताओं को भी मजबूत करेगी।

टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि फार्मास्युटिकल अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग नई दवाओं की खोज और विकास की प्रक्रिया को बदलने की क्षमता रखता है। हालांकि, संभावनाशील खोजों को वास्तविक दवाओं में बदलने के लिए लगातार निवेश और वैज्ञानिक सत्यापन जरूरी है।

पेप्ट्रिस के प्रतिनिधि ने कहा कि आरडीआई फंड के तहत मिला यह समर्थन कंपनी को महत्वपूर्ण प्री-क्लिनिकल चरणों को पूरा करने और एआई से खोजे गए अणुओं को तेजी से क्लिनिकल विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

कंपनी ने कहा कि उसका मॉडल एआई-आधारित खोज, प्रयोगात्मक सत्यापन और स्थापित दवा विकास प्रक्रियाओं का संयोजन है, जिसका उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र की अपूर्ण जरूरतों को पूरा करना और नई उपचारात्मक दवाओं का विकास करना है।

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