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Wednesday, February 18, 2026
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भारत में बनेगी राफेल में इस्तेमाल होने वाली ‘हैमर’ मिसाइल

जल्द ही समझौता ज्ञापन होने की उम्मीद

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114 राफेल विमानों की खरीद के बाद भारत और फ्रांस के बीच एक और बड़ा रक्षा समझौता होने जा रहा है। भारत ने राफेल में इस्तेमाल होने वाली ‘हैमर’ मिसाइल के लिए करार किया है। खास बात यह है कि यह मिसाइल अब भारत में ही बनाई जाएगी। इसके लिए जल्द ही एक समझौता ज्ञापन (MoU) होने की उम्मीद है। 17 फरवरी को फ्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वॉट्रिन भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करेंगी। दोनों नेता बेंगलुरु में छठे भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद में हिस्सा लेंगे। इस बैठक में मौजूदा रक्षा समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाने पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा भारत में हैमर मिसाइल के उत्पादन को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता होने की संभावना है। इससे दोनों सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त सैन्य अभ्यास को बढ़ावा मिलेगा।

“हैमर” शब्द का अर्थ हथौड़ा होता है। जैसे हथौड़े की चोट से सतह समतल हो जाती है, उसी तरह यह हथियार अपने लक्ष्य को पूरी तरह नष्ट करने की क्षमता रखता है। राफेल विमान में लगाया जाने वाला यह मिसाइल पहले फ्रांस से आयात किया जाता था, लेकिन नए समझौते के बाद इसका निर्माण भारत में होगा। यह एक स्मार्ट और सटीक-निर्देशित बम है, जो हवा से जमीन पर सटीक वार करता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 60 से 70 किलोमीटर तक है। पहाड़ी इलाकों और मजबूत बंकरों पर भी यह प्रभावी साबित हुआ है। भारत में उत्पादन होने से वायुसेना को तेज आपूर्ति मिलेगी, विदेशी निर्भरता घटेगी और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा।

इस मिसाइल को पहली बार 2007 में पेरिस एयर शो में पेश किया गया था। उस समय इसका नाम AASM (आर्ममेंट एयर-सोल मॉड्यूलर) था। 2011 में इसका नाम बदलकर HAMMER (हाईली एजाइल मॉड्यूलर म्युनिशन एक्सटेंडेड रेंज) रखा गया। यह मध्यम दूरी की हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है।

इसका वजन लगभग 330 किलोग्राम है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यह 60 किलोमीटर तक सटीक निशाना लगा सकती है।
एक बार लक्ष्य तय कर मिसाइल दागने के बाद सटीकता को लेकर चिंता की जरूरत नहीं रहती। यह स्थिर और गतिशील दोनों तरह के लक्ष्यों को भेद सकती है। यह आधुनिक नेविगेशन प्रणाली से लैस है, जिससे लक्ष्य चूकने की संभावना बेहद कम हो जाती है।

125 किलोग्राम से 1000 किलोग्राम तक अलग-अलग वारहेड विकल्प उपलब्ध हैं। दिन हो या रात, किसी भी मौसम में इसका उपयोग किया जा सकता है। राफेल विमान में छह 250 किलोग्राम वजन वाली हैमर मिसाइलें लगाई जा सकती हैं, जो एक साथ छह अलग-अलग लक्ष्यों पर वार कर सकती हैं।

इस चर्चा में 114 राफेल विमानों के करार पर भी बातचीत होने की संभावना है। इनमें से 96 विमान भारत में बनाए जाएंगे, जबकि बाकी विमान उड़ान के लिए तैयार स्थिति में आएंगे। इनके वितरण की जिम्मेदारी फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन पर होगी। राफेल इंजन बनाने वाली सैफ्रान पहले से ही हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ काम कर रही है।

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों कर्नाटक के वेमगल में हेलिकॉप्टर असेंबली लाइन का उद्घाटन करेंगे। यह परियोजना टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस के संयुक्त उपक्रम के तहत है, जहां एच-125 हेलिकॉप्टर बनाए जाएंगे। ये सभी समझौते भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। भविष्य में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए भारत का जोर स्वदेशी उत्पादन पर है।

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