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“जितना ज्यादा खाया जाता है, उतना बढ़ता है जानवर: मौलाना कासमी”!

मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने कहा कि अभी हाल ही में गायों के कुर्बानी के संदर्भ में केंद्र सरकार की ओर से सर्कुलेशन जारी किया गया है।

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नाखुदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने कहा कि हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया जाए। इससे कई तरह के विवादों का समाधान स्वत: हो जाएगा।

उन्होंने शनिवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि एक तरफ जहां हमारे मुसलमान भाई इसे खाना छोड़ देंगे, तो वहीं दूसरी तरफ इससे जुड़े अन्य विवादों के समाधान का मार्ग भी प्रशस्त हो जाएगा। इससे दोनों संप्रदायों से जुड़े लोगों के बीच में सभी समस्याओं का समाधान होने के साथ-साथ शांति की स्थापना हो जाएगी।

मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने कहा कि अभी हाल ही में गायों के कुर्बानी के संदर्भ में केंद्र सरकार की ओर से सर्कुलेशन जारी किया गया है। इस संबंध में 1950 में ही कानून बनाया गया था जिसे देखते हुए अब सरकार की ओर से सर्कुलेशन जारी किया गया है। निश्चित तौर पर इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता है कि इस सर्कुलेशन को जारी करने के बाद गायों की कुर्बानी मुश्किल हो जाएगी।

उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि अगर केंद्र सरकार की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया जाएगा, तो इससे गायों की कुर्बानी पर रोक लगेगी और एक्सपोर्ट और इंपोर्ट का सिलसिला भी थमेगा। साथ ही मंदिरों में भी पशुओं की बलि पर अंकुश लगाया जाना चाहिए।

अब हम इस मामले में दोहरा रवैया किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं कर सकते। हम यह बात बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं कि एक तरफ जहां आप गायों की कुर्बानी की बात करते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ हम देश बीफ एक्सपोर्ट के मामले में दूसरे पायदान पर है। लोग स्लॉटर हाउस खोलकर अथाह पैसे कमा रहे हैं।

हम इस तरह की स्थिति को किसी भी सूरत में स्वीकार करने वाले नहीं हैं। वहीं, दूसरी तरफ कुछ हमें खाने के नाम पर परेशान कर रहे हैं। हमें गौ के नाम पर पीटा जा रहा है। यह जुल्म है, उसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं कर सकते हैं। इस संबंध में कानून बनाया जाए और जो भी इसका उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

मौलाना ने कहा कि हम मुस्लिम समुदाय के लोगों से मांग करते हैं कि वो गाय का बहिष्कार करें। अब हम लोगों को सामने आकर इस समस्या का पूरी तरह से समाधान करना होगा, तभी जाकर आगे चलकर स्थिति अनुकूल होगी।

उन्होंने कहा कि जब मुस्लिम भाई गाय खाना पूरी तरह से बंद कर देंगे, तो मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि इसका सबसे ज्यादा नुकसान हिंदू भाइयों को होगा, क्योंकि हिंदू भाई गाय पालते हैं। इसके बाद जब कोई गाय दूध देने के लायक नहीं होती है, तो वो इसे मुस्लिम को बेच देते हैं। आमतौर पर जिस गाय की कीमत 15 हजार या 20 हजार रुपए होती है।

बकरीद के मौके पर उसी गाय को 70 हजार, 75 हजार और 1 लाख रुपए में बेचा जाता है। इस तरह से हमारे हिंदू भाई एक गाय को बेचकर चार गाय खरीदते हैं। इस तरह से देखे तो उनकी आर्थिक स्थिति समृद्ध होती है, लेकिन अब ऐसी स्थिति में जब मुस्लिम उस गाय को खाना छोड़ देंगे, तो हिंदू भाई उस गाय का क्या करेंगे? जाहिर सी बात है कि वो उसे खेत में छोड़ देंगे, सड़क पर छोड़ देंगे। इससे सड़क हादसे होंगे। गाय फसलों को नुकसान पहुंचाएंगी।

मौलाना ने कहा कि इस तरह की स्थिति अकबर बादशाह के समय पर भी पैदा हुई थी। उस समय कुछ हिंदू भाई अकबर बादशाह के पास गए थे और कहा था कि हम लोग गाय को गौ माता मानते हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि मुस्लिम इसे खाते हैं।

लिहाजा मुस्लिमों को मना कर दीजिए कि वो गाय को नहीं खाए। इस पर अकबर बादशाह ने कहा कि ठीक है, हम मुस्लिमों को मना कर देते हैं कि वो गाय नहीं खाए। इसके बाद अकबर बादशाह ने फरमान जारी कर सभी मुस्लिमों से कह दिया कि वो गाय नहीं खाए।

इसके छह महीने बाद सभी हिंदू भाई अकबर बादशाह के पास आए और कहने लगे कि मुस्लिम भाई जिस तरह से गाय खाते हुए आए हैं। उन्हें खाने दीजिए, क्योंकि हमारी सभी फसलें बर्बाद हो रही हैं। गाय की बढ़ती संख्या की वजह से कई तरह से सड़क दुर्घटनाएं देखने को मिल रही हैं, लोगों की जान जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि यह कुदरत का नियम है कि जिस जानवर को जितना ज्यादा खाया जाता है, वो उतना ज्यादा पैदा होता है। मुर्गी और बकरा कितना खाते हैं और आज इनकी संख्या का अंदाजा सहज ही लगा सकते हैं।

इसके अलावा आप देख सकते हैं कि शेर को लोग कितना खाते हैं तो शेर कहां पर है? आज की तारीख में लोग पूरी दुनिया में शेर को गिन रहे हैं कि इनकी संख्या कितनी है, तो कुल मिलाकर शेर को लेकर इस तरह की स्थिति पैदा हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि अगर इन सभी स्थिति को ध्यान में रखते हुए हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, तो हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि वो इसे राष्ट्रीय पशु का दर्जा दें। इससे सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान हो जाएगा।

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