एनआईए के अनुसार, शकील ने सुनवाई के दौरान अपना जुर्म कबूल किया। हालांकि, इस मामले में पहले ही 37 गवाहों से पूछताछ की गई थी। शकील को सिम कार्ड और ओटीपी समेत यूनिक पहचान सुविधाओं के साथ-साथ सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने का दोषी ठहराया गया है।
जांच एजेंसी ने बताया कि सीमा पार साजिश के मामले में उन भारतीय सिम कार्ड का इस्तेमाल शामिल था, जो गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के दौरान पाकिस्तानी नौसेना की ओर से गिरफ्तार किए गए मछुआरों के थे। इन मछुआरों के मोबाइल फोन और सिम कार्ड पाक नौसेना ने जब्त कर लिए थे और बाद में शकील ने भारत में जासूसी गतिविधियों को आसान बनाने के लिए उन्हें एक्टिवेट किया था।
साजिश की एनआईए जांच में पुष्टि हुई कि शकील ने भारतीय सिम कार्ड अपने मोबाइल हैंडसेट में डाले थे और वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) जेनरेट किए थे, जिन्हें उसने पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव (आईपीओ) के साथ शेयर किया था, जिससे पाकिस्तान से भारतीय व्हाट्सएप नंबर ऑपरेट किए जा सकें।
बाद में इन भारतीय नंबरों का इस्तेमाल पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटिव ने नकली पहचान के तहत भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान के कर्मियों से संपर्क करने के लिए किया, जिसका मकसद संवेदनशील और प्रतिबंधित रक्षा-संबंधी जानकारी हासिल करना था, जिससे भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता को खतरा हो।
जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि एनआईए साइबर-सक्षम और अन्य सीमा पार आतंकवादी और जासूसी गतिविधियों का मुकाबला करने व ऐसे सभी अपराधियों को सजा दिलाने के लिए अपने अथक प्रयास जारी रखे हुए है।
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