कोर्ट ने चमेली बाई, रवि मरकाम (उर्फ सुशील) और कोस्रू वड्डे को गवाहों के बयानों और जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर दोषी पाया। ‘एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट, 1908’ की धारा 4 और 5 के तहत सात साल की कड़ी सजा और हर एक पर 1,000 रुपये का जुर्माना; ‘अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट, 1967’ की धारा 10(1) के तहत दो साल की कड़ी सजा और 500 रुपये का जुर्माना और यूएपीए की अलग-अलग धाराओं के तहत पांच साल की कड़ी सजा और हर एक पर 500 रुपये का जुर्माना शामिल है।
19 मार्च 2024 को नारायणपुर पुलिस को मुखबिर से जानकारी मिली थी कि तारागांव में कुछ लोगों ने नक्सलवादियों तक पहुंचाने के इरादे से विस्फोटक सामग्री (पोटेशियम नाइट्रेट, कॉर्डेक्स वायर और डेटोनेटर) को औषधीय जड़ी-बूटियों के बंडलों में छिपाकर रखा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, जांच रायपुर में पुलिस मुख्यालय स्थित राज्य जांच एजेंसी को सौंप दी गई। पूछताछ और तकनीकी सबूतों से यह पता चला कि इन विस्फोटकों को नक्सलवादी कैडरों और उनके सप्लायरों तक पहुंचाने के लिए नारायणपुर बाजार से तारागांव तक रवि मरकाम और चमेली बाई के जरिए ले जाया जाना था।
जांच के दौरान, नारायणपुर ज़िले के ओरछा पुलिस स्टेशन इलाके में थुलथुली पंचायत के गावड़ी गांव के रहने वाले और मासा वड्डे के बेटे कोस्रू वड्डे की भी आरोपी के तौर पर पहचान की गई। उसे राज्य जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया। जांच पूरी होने के बाद नारायणपुर की स्पेशल कोर्ट (एन एक्ट) में चार्जशीट दाखिल की गई।
नारायणपुर पुलिस और राज्य जांच एजेंसी ने कहा कि वे नक्सल गतिविधियों का समर्थन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखेंगे और कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
