अमेरिका की नई 2025 राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (NSS) ने चीन को लेकर 2017 की तीखी भाषा को लगभग पूरी तरह पीछे छोड़ दिया है, जिससे वाशिंगटन की घोषित प्राथमिकताओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल की रणनीति ने चीन और रूस को पुनरीक्षणवादी शक्तियाँ बताते हुए अमेरिका की समृद्धि, सुरक्षा और सूचना ढाँचे के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया था। लेकिन आठ वर्षों में जिओपॉलिटिकल तनाव बढ़ने चीन के परमाणु शस्त्रागार के दोगुने होने, ताइवान को घेरते सैन्य अभ्यासों और अमेरिकी प्रणालियों में घुसपैठ के बाद भी नए दस्तावेज़ में दोनों देशों का उल्लेख बेहद कम है।
नई रणनीति का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अमेरिका अब अपने ध्यान का केंद्र इंडो-पैसिफिक या चीन को नहीं, बल्कि पश्चिमी गोलार्ध (Western Hemisphere) को बताता है। दस्तावेज़ ने आधुनिक मोनरो डॉक्ट्रिन का एक ट्रंप का बयान पेश करते हुए प्रवासन नियंत्रण, सीमा सुरक्षा और मादक पदार्थों की रोकथाम को शीर्ष प्राथमिकताएँ बताया है।
इस व्यापक बदलाव के बीच चीन पर अमेरिकी रुख उल्लेखनीय रूप से नरम हो गया है, न तो उसे सबसे बड़ी राष्ट्रीय चुनौती कहा गया है और न ही वैचारिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में तीखा चित्रण किया गया है। उसका ज़िक्र अधिकतर व्यापार, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और सप्लाई-चेन से जुड़ी भाषा में आता है।
रूस के संदर्भ भी चार संक्षिप्त पैराग्राफ़ों तक सीमित हैं। यूक्रेन युद्ध, लाखों हताहतों या मॉस्को के यूरोप में छाया अभियानों पर कोई स्पष्ट आलोचना नहीं की गई। इसके बजाय दस्तावेज़ अमेरिका को एक संभावित मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत करता है, जो यूरोप और रूस के बीच तनाव घटाने में मदद कर सकता है। यही रुख साइबर सुरक्षा पर भी दिखता है। दैनिक चीनी घुसपैठों पर लगभग कोई उल्लेख नहीं, जबकि हाल ही में अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने नए हमलों की चेतावनी दी थी।
सबसे बड़ा विस्मयकारी पहलू यह है कि उत्तर कोरिया का नाम ही नहीं है, जबकि 2017 में ट्रंप इसे अमेरिका पर विनाशकारी प्रहार करने में सक्षम बताते थे। उसका परमाणु भंडार अब 60 से अधिक हथियारों तक पहुँचा माना जाता है, फिर भी रणनीति में कोई आकलन शामिल नहीं। ईरान को लेकर भी भाषा अस्पष्ट और विरोधाभासी है। एक जगह दावा किया जा रहा है कि वाशिंगटन ने उसका परमाणु संवर्धन नष्ट कर दिया है, तो दूसरी जगह लिखा है कि कार्यक्रम सिर्फ़ “कमज़ोर” हुआ है।
प्रशासन का तर्क है कि दस्तावेज़ सीमित खतरों पर केंद्रित है और हर मुद्दे को रणनीति में समाहित नहीं किया जा सकता। फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया NSS वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों के प्रति टकराव वाली भाषा को काफी हद तक कम करता दिखा है और ट्रंप के अमेरिका फर्स्ट ढाँचे के तहत घरेलू सुरक्षा, आर्थिक रक्षा और प्रवासन नियंत्रण को शीर्षतम प्राथमिकता पर रखता है।
इस प्रकार 2025 की नई सुरक्षा रणनीति बताती है कि चीन, जो हाल तक अमेरिका का केंद्रीय रणनीतिक चुनौती-चिह्न माना जाता था, अब आधिकारिक दस्तावेज़ में कहीं अधिक नीचे खिसका दिया गया है और वाशिंगटन का फोकस स्पष्ट रूप से सीमा, प्रवासन, क्षेत्रीय प्रभाव और घरेलू शक्ति-निर्माण पर स्थानांतरित हो गया है।
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