डोनाल्ड ट्रंप को ऐसे सैन्य विकल्पों की जानकारी दी गई है जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली हुसैनी ख़ामेनेई और उनके बेटे मोजतबा खामेनेई पर लक्षित हमले की संभावना शामिल है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई है, जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक सूत्रों का हवाला दिया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, जिन परिदृश्यों पर चर्चा हुई उनमें से एक में आयतुल्लाह और उसके बेटे पर हमला करने का विकल्प भी शामिल था। कथित तौर पर खामेनेई और उनके संभावित उत्तराधिकारी माने जाने वाले मोजतबा खामेनेई की ओर संकेत करता है। हालांकि, एक वरिष्ठ सलाहकार ने स्पष्ट किया कि अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपती ने अभी तक स्ट्राइक करने का फैसला नहीं किया है। मुझे यह पता है क्योंकि हमने स्ट्राइक नहीं किया है। हो सकता है कि वह कभी ऐसा न करें। हो सकता है कि वह कल उठें और कहें, ‘बस हो गया,’” जिससे संकेत मिलता है कि विचार-विमर्श की प्रक्रिया अभी जारी है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग ने राष्ट्रपति के समक्ष कई सैन्य विकल्प प्रस्तुत किए हैं। एक सलाहकार ने कहा, “उनके पास हर सिनेरियो के लिए कुछ न कुछ है। राष्ट्रपति क्या चुनते हैं, यह कोई नहीं जानता।” एक अन्य स्रोत ने पुष्टि की कि खामेनेई और उनके बेटे को निशाना बनाने की योजना कई सप्ताह पहले ही राष्ट्रपति के सामने रखी गई थी।
इन खबरों के बीच, अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा दी है। 2003 के इराक युद्ध के बाद यह क्षेत्र में अमेरिकी वायु शक्ति की सबसे बड़ी तैनाती मानी जा रही है। इसमें F-35, F-22, F-15 और F-16 जैसे उन्नत लड़ाकू विमान, कमांड-एंड-कंट्रोल विमान तथा सुदृढ़ वायु रक्षा प्रणाली शामिल हैं।
अमेरिकी नौसेना के 13 पोत वर्तमान में मध्य पूर्व और पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात हैं, जिनमें विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन और नौ मिसाइल-सक्षम विध्वंसक शामिल हैं। एक अन्य विमानवाहक पोत USS जेराल्ड आर फोर्ड और उसका स्ट्राइक समूह भी क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य बल इस सप्ताहांत तक कार्रवाई के लिए तैयार हो सकते हैं, हालांकि राष्ट्रपति ने अभी तक किसी हमले को अधिकृत नहीं किया है। व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई बैठकों में वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों को बताया गया कि सभी तैनात बलों की मध्य मार्च तक पूर्ण तैनाती की उम्मीद है।
तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव और सीमित कूटनीतिक प्रगति के बीच यह गतिरोध एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दोनों पक्ष टकराव से पीछे हटते हैं या स्थिति खुली सैन्य भिड़ंत की ओर बढ़ती है।



