अमेरिका को भारत जैसा इलेक्शन सिस्टम चाहिए

ट्रंप ने कहा, अमेरिका में बिना ID के चुनाव क्यों?

अमेरिका को भारत जैसा इलेक्शन सिस्टम चाहिए

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के इलेक्टोरल सिस्टम का हवाला देते हुए ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को मंज़ूरी देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत के चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार ने US एडमिनिस्ट्रेशन से पूछा था कि अमेरिका में बिना वैलिड फोटो ID के चुनाव कैसे हो सकते हैं। ट्रंप ने आगे कहा, अब हमें ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को मंज़ूरी देनी ही होगी। US के इलेक्टोरल प्रोसेस को और सख़्त बनाने की ज़रूरत है। इससे अमेरिकी चुनावों की सिक्योरिटी और क्रेडिबिलिटी बढ़ेगी।

‘सेव अमेरिका एक्ट’ एक प्रपोज़्ड बिल है। इसका मकसद अमेरिका में वोटर रजिस्ट्रेशन और वोटिंग से जुड़े नियमों को सख़्त करना है। इस कानून के तहत, वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का डॉक्यूमेंट्री प्रूफ देना और वोटिंग के समय फोटो ID दिखाना ज़रूरी होगा। बिल में ‘मेल-इन वोटिंग’ (डाक से वोटिंग) प्रोसेस पर भी बड़ी रोक लगाने का प्रपोज़ल है। हालांकि इस बिल को US हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स ने मंज़ूरी दे दी है, लेकिन इसे अभी सीनेट ने मंज़ूरी नहीं दी है।

इस मुद्दे पर डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टियों के बीच मतभेद हैं। ट्रंप लगातार ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पास करने पर ज़ोर देते रहे हैं। उनके मुताबिक, इस कानून से चुनावी गड़बड़ी पर रोक लगेगी।

US में ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पर विवाद क्यों है?

US में वोटर ID पर लंबे समय से राजनीतिक बहस चल रही है। सपोर्टर्स का तर्क है कि फोटो ID और नागरिकता का सबूत चुनावों की विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद करेगा। दूसरी ओर, विरोधियों का तर्क है कि US में गैर-नागरिकों पर पहले से ही वोट देने पर बैन है, और सख्त डॉक्यूमेंटेशन की ज़रूरतें उन वोटर्स पर बुरा असर डाल सकती हैं जिनके पास बर्थ सर्टिफिकेट या वैलिड पासपोर्ट जैसे डॉक्यूमेंट्स नहीं हैं। बाइपार्टिसन पॉलिसी सेंटर के अनुसार, US में लगभग 12% रजिस्टर्ड वोटर्स के पास यूनिवर्सली एक्सेप्टेड डॉक्यूमेंट्री सबूत नहीं हैं।

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