अयोध्या में राम मंदिर में चंदा चोरी और फाइनेंशियल गड़बड़ियों के मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व जनरल सेक्रेटरी चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा को बड़ी राहत मिली है। मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी फाइनल रिपोर्ट में दोनों को क्लीन चिट दे दी है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनल रिपोर्ट में न तो चंपत राय और न ही अनिल मिश्रा का नाम आरोपी के तौर पर लिया गया है।
उत्तर प्रदेश होम डिपार्टमेंट ने सोमवार को SIT की फाइनल रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी। इससे चंपत राय और अनिल मिश्रा को इस केस में बड़ी राहत मिली है, जो पिछले कुछ हफ्तों से खबरों में है।
राम मंदिर में भक्तों से मिलने वाले चंदे और चढ़ावे के मैनेजमेंट में कथित गड़बड़ियों के आरोप जून में सामने आए थे। 7 जून को समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण उर्फ पवन पांडे ने आरोप लगाया था कि मंदिर के दान से करीब 5 से 7.5 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई है। इन आरोपों के बाद मामले ने बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक तूल पकड़ लिया। इसके बाद, मंदिर ट्रस्ट के कहने पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यों वाली SIT बनाई। टीम लखनऊ डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में बनाई गई थी।
SIT ने 15 से 20 जून तक अयोध्या में शुरुआती जांच की। मंदिर में आने वाले दान को मैनेज करने के पूरे प्रोसेस की जांच की गई। इसमें दान पेटियों से पैसे निकालना, कैश गिनना, पैसे रखने का इंतज़ाम, अकाउंटिंग प्रोसेस, एक्सेस कंट्रोल और CCTV सर्विलांस जैसे कई पहलू शामिल थे। SIT रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती जांच में भक्तों से मिले कैश और कीमती सामान के मैनेजमेंट में पहली नज़र में कुछ गड़बड़ियां पाई गईं। दान चोरी के आरोप सामने आने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों ने 27 जून को ट्रस्ट में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।
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