तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार(15 जून) को ईरान को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “अगर हम पर किसी भी प्रकार का हमला हुआ—किसी भी रूप में—तो अमेरिका की सशस्त्र सेनाओं की पूरी ताक़त तुम्हारे ऊपर टूट पड़ेगी, वो भी उस स्तर पर जो पहले कभी नहीं देखा गया।”
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब शनिवार को इज़राइल ने तेहरान में ईरान के रक्षा मंत्रालय मुख्यालय को निशाना बनाया और बुशहर प्रांत में दक्षिण पारस गैस क्षेत्र से जुड़े एक प्राकृतिक गैस संयंत्र पर भी हमला किया।
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इन इज़राइली हमलों में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे टकराव को खत्म कर “बहुत आसानी से एक समझौता करवा सकते हैं।” उनका यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि दोनों देशों के बीच छठे दौर की परमाणु वार्ता को ईरान ने रविवार को रद्द कर दिया है।
जहां इज़राइल लगातार ईरानी ठिकानों को निशाना बना रहा है, वहीं अमेरिका अब खुद को युद्ध से बाहर रखने कोशिश कर रहा है। हालांकि ईरान की तरफ से होने वाले कई हमलें अमेरिका ने रोकने दावे किए जा रहें है, जिसके चलते शनिवार को खोमेनई शासन ने अमेरिका सहित ब्रिटन और फ़्रांस को भी चेतावनी दी थी। लेकिन ट्रंप की यह आक्रामक भाषा और चेतावनी यह संकेत दे रही है कि अमेरिका किसी भी हमले या प्रतिरोध की स्थिति में चुप नहीं बैठेगा।
वहीं ईरान द्वारा परमाणु वार्ता को अचानक रद्द कर देना दर्शाता है कि वह भी कूटनीतिक पिच से हटकर अब एक प्रतिरोध की मुद्रा में आ सकता है। डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान वैश्विक राजनय में एक और उथल-पुथल का संकेत हो सकता है। ईरान पर ‘अभूतपूर्व ताक़त’ के उपयोग की चेतावनी न सिर्फ इस क्षेत्र में युद्ध के बादल घना कर सकती है, बल्कि आने वाले दिनों में परमाणु कूटनीति, इज़राइल-ईरान संघर्ष और अमेरिका की पश्चिम एशिया नीति को भी नए मोड़ पर ला सकती है।
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