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Tuesday, January 6, 2026
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ट्रम्प की टैरिफ नीति से अमेरिकी शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव!

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अमेरिकी टैरिफ नीति पर अंतर्राष्ट्रीय जनमत में भय का माहौल अमेरिका के शेयर बाजार में फैल रहा है। इससे एक महीने से भी कम समय में 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बाजार मूल्य का नुकसान हुआ है। चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के अधीनस्थ सीजीटीएन द्वारा किए गए एक वैश्विक सर्वेक्षण के अनुसार, अधिकांश उत्तरदाताओं ने अमेरिका की नई सरकार की टैरिफ नीति पर सवाल उठाए हैं और अमेरिकी शेयर बाजार के निराशाजनक प्रदर्शन के नकारात्मक प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। एक नेटिजन ने कहा कि विदेशों से आयातित सभी उत्पादों पर कर लगाना एक अच्छा विचार नहीं है।

अमेरिकी शेयर बाजार पर प्रभाव:
  • बाजार मूल्य में गिरावट: टैरिफ नीतियों के प्रभाव से अमेरिकी शेयर बाजार में एक महीने से भी कम समय में 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है।
  • प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट: सोमवार को टेस्ला के शेयरों में 15.4% की गिरावट आई, जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चिप दिग्गज एनवीडिया में 5% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। मेटा, अमेज़ॅन और अल्फाबेट जैसी अन्य प्रमुख तकनीकी कंपनियों के शेयरों में भी भारी गिरावट देखी गई।

ट्रंप के बयान और निवेशकों की प्रतिक्रिया:

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि शेयर बाजार के प्रदर्शन पर ज़्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। इस पर 86.7 प्रतिशत वैश्विक उत्तरदाताओं का मानना है कि ट्रंप अमेरिकी शेयर बाजार पर टैरिफ नीतियों के नकारात्मक प्रभाव को कम करना चाहते हैं। इसके तुरंत बाद, ट्रंप ने कनाडा से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले स्टील और एल्युमीनियम के उत्पादों पर टैरिफ 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की घोषणा की, जिससे अमेरिकी शेयर बाजार में फिर उथल-पुथल मच गई।

वैश्विक मंदी की आशंका:

अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट ने वैश्विक मंदी की आशंका को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, जिससे अन्य देशों के बाजार भी प्रभावित हो सकते हैं।

भारत पर संभावित प्रभाव:
  • निर्यात पर असर: अमेरिका द्वारा भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करने से भारतीय निर्यात महंगा हो सकता है, जिससे भारतीय कंपनियों की कमाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • विनिमय दर पर प्रभाव: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक के लिए नीतियां बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
निवेशकों के लिए सलाह:

वर्तमान बाजार अस्थिरता को देखते हुए, निवेशकों को सतर्क रहने और दीर्घकालिक निवेश रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी जाती है। विविधीकृत पोर्टफोलियो बनाए रखना और बाजार के मौजूदा रुझानों पर नज़र रखना महत्वपूर्ण है। अंत में, अमेरिकी टैरिफ नीतियों के प्रभाव को समझने और उसके अनुसार निवेश निर्णय लेने के लिए निवेशकों को अद्यतन जानकारी पर ध्यान देना आवश्यक है।

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