विदेश मंत्रालय (MEA) ने संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा रिपोर्ट का स्वागत किया है, जिसमें पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की भूमिका को दिल्ली में लाल क़िला के पास हुए 2025 के भीषण आतंकी विस्फोट से जोड़ा गया है। यह रिपोर्ट भारत द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही उन आशंकाओं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि करती है, जिनमें सीमा-पार आतंकवाद और पाकिस्तान प्रायोजित नेटवर्क की बात कही जाती रही है।
4 फरवरी 2026 को जारी संयुक्त राष्ट्र की UN Analytical and Support Sanctions Monitoring Team की 37वीं रिपोर्ट में भारत द्वारा दी गई चेतावनी को स्पष्ट रूप से स्वीकारा गया है। साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में MEA के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह दस्तावेज़ नई दिल्ली की चिंताओं को गंभीरता से लेता है और वैश्विक आतंकवाद विरोधी प्रयासों को मज़बूती देता है।
9 नवंबर 2025 को लाल क़िला के पास हुए आतंकी हमले में 12 लोगों की मौत हुई थी। UN रिपोर्ट में JeM को इस हमले से सीधे तौर पर जोड़ा गया है और उल्लेख किया गया है कि संगठन ने कई हमलों की ज़िम्मेदारी लेने का दावा किया था। रिपोर्ट में भारत द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा गया है कि JeM की गतिविधियाँ लगातार क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा दे रही हैं।
रिपोर्ट का एक अहम और चिंताजनक पहलू JeM प्रमुख मसूद अजहर (UN सूची QDi.422) से जुड़ा है। दस्तावेज़ के अनुसार, 8 अक्टूबर 2025 को मसूद अजहर ने ‘जमात-उल-मुमिनात’ नाम से JeM की एक महिला विंग के गठन की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य आतंकी गतिविधियों को समर्थन देना, निगरानी, लॉजिस्टिक्स और संभावित हमलों में सहायता शामिल है। भारतीय खुफिया एजेंसियां पहले ही अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को JeM की इस बदलती रणनीति के बारे में आगाह कर चुकी थीं।
UN रिपोर्ट में JeM से जुड़े एक अन्य हमले का भी ज़िक्र है, 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला। इसमें शामिल तीन आतंकियों को 28 जुलाई को सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन महादेव में मार गिराया । इसको लेकर UN रिपोर्ट यह भी इंगित करती है कि सीमा-पार सुरक्षित ठिकानों के कारण आतंकी गतिविधियाँ पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
भारत की ओर से UN प्रतिबंध निगरानी टीम के साथ लगातार और सक्रिय संवाद ने इस रिपोर्ट के स्वर को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है। विस्तृत साक्ष्य साझा कर भारत ने पाकिस्तान के इनकार को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चुनौती दी है। MEA का कहना है कि इस तरह की रिपोर्टें JeM के आतंकियों और उनके वित्तपोषकों पर कड़े प्रतिबंधों का रास्ता खोल सकती हैं।
इस बीच, 28 जनवरी 2026 को रियाद में हुई भारत–सऊदी अरब सुरक्षा कार्यसमूह की तीसरी बैठक में दोनों देशों ने रेड फोर्ट और पहलगाम हमलों की कड़ी निंदा की थी। यह बैठक MEA के संयुक्त सचिव विनोद बहादे और सऊदी अधिकारी अहमद अल-ईसा की सह-अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख दोहराया गया।
UN की 37वीं रिपोर्ट सार्वजनिक होने से JeM की गतिविधियों पर वैश्विक निगरानी और बढ़ेगी। भारत के लिए यह वर्षों से किए जा रहे साक्ष्य-संग्रह की पुष्टि है, हालांकि आतंकी नेटवर्क की निरंतर सक्रियता सतर्कता और कूटनीतिक दबाव को बनाए रखने की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। रेड फोर्ट हमला, 2001 के संसद हमले की तरह, एक बार फिर आंतरिक सुरक्षा, खुफिया समन्वय और सीमा निगरानी पर बहस को तेज़ कर रहा है।
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