यह वर्ष क्लब के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि क्लब अपनी गणेश पूजा के 50वें वर्ष का जश्न मना रहा है। स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में, सदस्यों ने भगवान गणेश के सबसे लोकप्रिय फल, सेब का उपयोग करके एक विशिष्ट मूर्ति बनाने का निर्णय लिया। मूर्ति को डिजाइन करने के लिए विभिन्न रंगों के लगभग 1,500 किलोग्राम सेबों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
खास बात यह है कि इस काम के लिए किसी पेशेवर कारीगर की जरूरत नहीं है। बल्कि, क्लब के सदस्य इस विशाल सेब की मूर्ति को आकार देने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।
क्लब के वरिष्ठ सदस्य गोपाल पंसारी ने आईएएनएस को बताया, “इसकी तैयारी दो महीने पहले शुरू हो गई थी, हालांकि इस मूर्ति का विचार तीन साल पहले आया था।”
उन्होंने आगे बताया, “क्लब इस उत्सव के लिए न तो कोई दान इकट्ठा करता है और न ही कोई बजट तैयार करता है। मूर्ति और उत्सव की व्यवस्था का सारा खर्च सदस्य स्वयं स्वेच्छा से वहन करते हैं।”
नटराज क्लब के एक अन्य सदस्य शिव कुमार राठी ने बताया, “इस बार क्लब की गोल्डन जुबली है, इसलिए हमने कुछ नया करने का सोचा। सेब से भगवान गणेश की मूर्ति तैयार करने में हमें ढाई महीने का समय लगा है।
बता दें कि नटराज क्लब ने वर्षों से केले, लड्डू और नारियल जैसी अनोखी वस्तुओं से गणेश प्रतिमाएं बनाने के लिए प्रसिद्धि अर्जित की है। इस वर्ष की सेब गणेश प्रतिमा भक्तों और आगंतुकों के लिए एक और प्रमुख आकर्षण होने की उम्मीद है।
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