अमेरिका ने भारत को रूसी तेल की समुद्र में फंसी खेप खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दे दी है। दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने मीडिया एजेंसी से कहा कि इस कदम का उद्देश्य वैश्विक तेल बाजार पर बढ़ते दबाव को कम करना है, जो अमेरिका-ईरान युद्ध और आपूर्ति बाधाओं के कारण अस्थिर हो गया है।
गुरुवार (5 मार्च) को जारी बयान के तहत इस छूट से रूसी तेल खेपों को भारत में बेचा जा सकेगा जो अमेरिकी प्रतिबंधों के नए दौर लागू होने से पहले ही टैंकरों में लोड कर दी गई थीं, लेकिन कड़े प्रतिबंधों के कारण उनके खरीदार नहीं मिल पा रहे थे। अधिकारियों के अनुसार यह छूट सीमित अवधि के लिए है और केवल उन्हीं कार्गो पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में मौजूद हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इस निर्णय की पुष्टि करते हुए कहा, “ भारत अमेरिका का एक ज़रूरी पार्टनर है और ईरान द्वारा ग्लोबल एनर्जी को बंधक बनाने की कोशिश की वजह से पैदा हुए दबाव से भारत को राहत मिलेगी।” उनके अनुसार अमेरिका को उम्मीद है कि भारत भविष्य में अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा।
बेसेंट ने कहा, “वैश्विक बाजार में तेल का फ्लो जारी रखने के लिए, US भारतीय रिफाइनर को रूसी तेल खरीदने की इजाज़त देने के लिए 30 दिन की छूट दे रहा है।” बेसेंट के अनुसार यह अस्थायी छूट केवल समुद्र में मौजूद कार्गो तक सीमित है और इससे मॉस्को को वित्तीय रूप से बड़ा लाभ नहीं होगा।
यह छूट ऐसे समय में दी गई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। रॉयटर्स के अनुसार भारत के पास कच्चे तेल का भंडार लगभग 25 दिनों की मांग के बराबर है और देश अपनी लगभग 40 प्रतिशत तेल जरूरतें मध्य पूर्व से आयात करता है। इन आपूर्तियों का बड़ा हिस्सा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है।
मौजूदा संघर्ष के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जो वैश्विक तेल प्रवाह के लगभग 20 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार माना जाता है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।
भारतीय रिफाइनरियों की सक्रियता
रिपोर्ट के अनुसार भारत की सरकारी रिफाइनरियां, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड रूसी कच्चे तेल की तत्काल डिलीवरी के लिए ट्रेडर्स से बातचीत कर रही हैं। सूत्रों ने बताया कि भारतीय सरकारी रिफाइनरियां अब तक लगभग 2 करोड़ बैरल रूसी तेल खरीद चुकी हैं।
कुछ रिफाइनरियों के लिए यह रूसी आपूर्ति की वापसी भी है। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार हिंदुस्तान पेट्रोलियम और मैंगलोर रिफाइनरी ने नवंबर के बाद पहली बार रूसी तेल की खेप प्राप्त करने की तैयारी की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल रूसी यूराल्स कच्चा तेल भारतीय खरीदारों को ब्रेंट के मुकाबले प्रति बैरल 4-5 डॉलर के प्रीमियम पर पेश किया जा रहा है, जिसकी डिलीवरी मार्च और अप्रैल की शुरुआत में हो सकती है। यह फरवरी के मुकाबले बड़ा बदलाव है, जब इसी तरह की खेपें ब्रेंट से लगभग 13 डॉलर प्रति बैरल कम कीमत पर बिक रही थीं।
विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि इन खेपों को पूरी तरह रोका जाता तो वैश्विक बाजार से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की आपूर्ति हट सकती थी। इससे तेल कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका थी।
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