मुंबई में भाजपा विधायक राम कदम ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें सबसे पहले स्वयं यह समझना चाहिए कि वे किन राजनीतिक दलों के साथ रहे हैं। उद्धव ठाकरे उन लोगों के साथ सत्ता में बैठे, जिन्होंने राम मंदिर पर सवाल उठाए और मंदिर निर्माण में कानूनी अड़चनें पैदा करने की कोशिश की थी।
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने उद्धव ठाकरे के बयान को गंभीरता से लेने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे आज की राजनीति में पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुके हैं और उनके साथ जुड़े अधिकांश नेता एवं जनप्रतिनिधि उनका साथ छोड़ चुके हैं। राजनीतिक हताशा के कारण उद्धव ठाकरे इस प्रकार के बयान दे रहे हैं। उनके बयानों को न तो जनता गंभीरता से ले रही है और न ही मीडिया को अधिक महत्व देना चाहिए।
शिवसेना की विधान परिषद सदस्य मनीषा कायंदे ने भी उद्धव ठाकरे की टिप्पणी पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे स्वयं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनके जैसे वरिष्ठ नेता को इस प्रकार की टिप्पणी करना शोभा नहीं देता।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा कि उद्धव ठाकरे को भाजपा और उसके वैचारिक आधार पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। यही उद्धव ठाकरे सत्ता के लिए कांग्रेस के साथ सरकार बनाने को तैयार हो गए थे।
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