US ने ईरानी इकॉनमी के 5 खास सेक्टर पर नए बैन लगाए हैं। ये वे चैनल हैं जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों के साथ अपनी इकॉनमिक एक्टिविटी के लिए करता है। इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग शामिल हैं। US इन सेक्टर के ज़रिए ईरान के रेवेन्यू और इंटरनेशनल ट्रेड को रोकना चाहता है।
यानी, अगर कोई देश इन सेक्टर में ऐसे ट्रांज़ैक्शन करता है जिससे ईरान को फाइनेंशियली फायदा होता है, तो US उस देश पर बैन भी लगा सकता है या उसे US डॉलर इकॉनमी से भी हटा सकता है। US ने अभी यह साफ नहीं किया है कि किन देशों पर सेकेंडरी बैन लगेंगे। हालांकि, चीन, तुर्की और यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ईरान के बड़े ट्रेडिंग पार्टनर हैं।
ईरान के पास अब सिर्फ दो ऑप्शन
US ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि हमने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू किया है। यह ईरान और उसके साथियों के खिलाफ एक कैंपेन है। ईरान के पास अब सिर्फ दो ऑप्शन हैं। पहला – खुद को दुनिया से पूरी तरह अलग करना और गुज़ारे लायक इकॉनमी बनाना। दूसरा – फिर से नॉर्मल हालात की ओर बढ़ना और ग्लोबल इकॉनमी में फिर से शामिल होने का मौका मिलना।
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