अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार उसकी सेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित मिसाइल ठिकानों पर हमले किए हैं। इन हमलों में 5,000 पाउंड (करीब 2,200 किलोग्राम) वज़न वाले कई ‘बंकर बस्टर’ बमों का इस्तेमाल किया गया। इस कार्रवाई से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ गया है।
सेंट्रल कमांड ने बुधवार (18 मार्च)तड़के (IST) एक ट्वीट में कहा, “कुछ घंटे पहले, अमेरिकी सेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास ईरान के तटीय क्षेत्र में स्थित कई सुदृढ़ मिसाइल ठिकानों पर 5,000 पाउंड वज़न वाले गहराई तक भेद करने वाले हथियारों का सफलतापूर्वक उपयोग किया।” सेना का दावा है कि ये हमले ईरान के जहाज-रोधी क्रूज़ मिसाइलों को निशाना बनाकर किए गए, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा बन रहे थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के अधिकांश सहयोगी देश ईरान में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई में सीधे शामिल होने के इच्छुक नहीं हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त अभियान को नाटो देशों का समर्थन है, भले ही वे इसमें सक्रिय रूप से भाग नहीं लेना चाहते। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “सब हमारे साथ सहमत हैं, लेकिन वे मदद नहीं करना चाहते। और अमेरिका के रूप में हमें यह याद रखना होगा, क्योंकि यह हमारे लिए काफी चौंकाने वाला है।”
कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने देशों से अपील की थी कि वे होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अपने युद्धपोत भेजें। हालांकि, अमेरिका के करीबी सहयोगियों समेत कई देशों ने इस अपील पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है।
ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण मार्ग बना हुआ है। यह संकरा समुद्री रास्ता दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल परिवहन का प्रमुख मार्ग है, जो मौजूदा हालात में प्रभावी रूप से बाधित हो रहा है।
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