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Thursday, February 5, 2026
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अमेरिका-चीन व्यापार वार: पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज ‘गिरा धड़ाम’!

इस गिरावट को पीएसएक्स के इतिहास में सबसे तीव्र एकल-दिवसीय गिरावटों में से एक कहा जा रहा है।

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पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज (पीएसएक्स) में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार में अस्थिरता को कम करने और घबराहट में बिकवाली को रोकने के मकसद से कारोबार को एक घंटे के लिए अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया। हालांकि, एक घंटे के अंतराल के बाद बाजार जब खुला तो इसमें और गिरावट आई। अमेरिका की तरफ से लगाए गए टैरिफ और चीन के जवाबी कदमों से वैश्विक बाजारों में तनाव पैदा हो गया।

पाकिस्तान के शेयर बाजार ‘केएसई-100’ सूचकांक में सोमवार को एक घंटे के कारोबार निलंबन के बावजूद 6,000 अंकों से अधिक की गिरावट आई। इस गिरावट को पीएसएक्स के इतिहास में सबसे तीव्र एकल-दिवसीय गिरावटों में से एक कहा जा रहा है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि, ‘निवेशक भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ने से भयभीत हैं।’ पाकिस्तानी शेयर मार्केट में गिरावट, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार तनाव के कारण एशियाई बाजारों में आई भारी गिरावट का आनुपातिक प्रभाव है।

पाकिस्तानी शेयर बाजार में आई ताजा गिरावट को रिकॉर्ड ‘डे-टू-डे’ गिरावट बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक मंदी के डर से निवेशक बाजार से पलायन कर रहे हैं।

केसीएम ट्रेड के मुख्य बाजार विश्लेषक टिम वाटरर ने कहा, “व्यापारी दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ पर एक दूसरे से टक्कर लेने की आशंका से घबराए हुए हैं। उन्हें डर है कि लंबे समय तक चलने वाली आर्थिक लड़ाई से दोनों को भारी नुकसान हो सकता है।”

सोमवार को एशियाई और अन्य वैश्विक बाजारों में भी बड़ी गिरावट देखी गई क्योंकि अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया। जानकारी के अनुसार, जापान का निक्केई सूचकांक खुलने के बाद आठ प्रतिशत से अधिक गिर गया, टॉपिक्स में 6.5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट हुई।

चीन में शंघाई कम्पोजिट में कम से कम 6.7 प्रतिशत की गिरावट आई, ब्लू चिप सीएसआई300 में 7 प्रतिशत की गिरावट आई। हांगकांग में बाजार 9 प्रतिशत की गिरावट के साथ खुला, जबकि अलीबाबा और टेनसेंट जैसी दिग्गज टेक कंपनियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा।

चीन की ओर से की गई कड़ी जवाबी कार्रवाई के बाद यह बिकवाली हुई। बीजिंग ने सभी अमेरिकी वस्तुओं पर 34 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से व्यापार शुल्क में अचानक की गई बढ़ोतरी के जवाब में उठाया गया, जिससे लंबे समय तक चलने वाले और नुकसानदेह आर्थिक संघर्ष की आशंका पैदा हो गई।

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