अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर नए प्रतिबंध लगाने की बात कही जा रही है। व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलीन लीविट ने मंगलवार (19 अगस्त) को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप “युद्ध को खत्म करने के लिए जबरदस्त सार्वजनिक दबाव बना रहे हैं। राष्ट्रपति ने भारत पर प्रतिबंध लगाए हैं और अन्य कदम भी उठाए हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे इस युद्ध को खत्म होते देखना चाहते हैं।” लीविट के इस दावे से भारत के व्यापर क्षेत्र में हलचल मची है। अब सवाल उठने लगे है की अमेरिका की ओर से भारत पर टेर्रिफ लगया गया है या फिर प्रतिबंध।
लेविट के अनुसार, “ मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष को भी राष्ट्रपति ट्रंप ने व्यापारिक दबाव डालकर रोका था। अगर हमारे पास ऐसा राष्ट्रपति नहीं होता, जो अपने पद की शक्ति और दबदबे पर विश्वास रखता है, तो यह संघर्ष परमाणु युद्ध में बदल सकता था।”
टैरिफ़ का अर्थ है किसी वस्तु या सेवा के आयात-निर्यात पर लगाया गया कर या शुल्क। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार के लिए राजस्व एकत्रित करना या घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा देना होता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई देश अपने यहाँ के स्टील उद्योग को बचाना चाहता है, तो वह बाहर से आने वाले स्टील पर अधिक टैरिफ़ लगा सकता है। टैरिफ़ हमेशा आर्थिक नीति का हिस्सा होता है और यह किसी भी देश के सभी व्यापारिक साझेदारों पर समान रूप से लागू किया जा सकता है।
प्रतिबंध (Sanctions) दूसरी ओर, राजनीतिक या रणनीतिक कारणों से लगाए जाते हैं। यह केवल व्यापारिक दंड नहीं बल्कि एक तरह का दबाव बनाने का साधन होता है। प्रतिबंध किसी विशेष देश, संस्था या व्यक्ति पर लगाए जा सकते हैं और इसमें व्यापार रोकना, संपत्ति फ्रीज़ करना, निवेश पर रोक या यात्रा-प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी देश द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन या आतंकवाद समर्थन करने पर संयुक्त राष्ट्र या अन्य देश उस पर प्रतिबंध लगा सकते हैं।
संक्षेप में, टैरिफ़ का मुख्य उद्देश्य आर्थिक लाभ होता है, जबकि प्रतिबंध का उद्देश्य राजनीतिक दबाव और अनुशासन स्थापित करना होता है। दूसरी और रूस भारत के लिए हो सके उतनी छूट देने की कोशीश में लगा है।
इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने भारत पर रूस से तेल खरीदी पर कुल 50 प्रतिशत तक के टैरिफ लगाए थे। इनमें 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क रूस से खरीदे जाने वाले तेल पर लगाया गया है। ये शुल्क 27 अगस्त से लागू होने है, जिन्हे भारत ने अनुचित और अव्यावहारिक बताया है। नई दिल्ली का कहना है कि किसी भी बड़े अर्थव्यवस्था की तरह वह अपने राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।
इससे पहले अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में भारत पर रूसी तेल को दोबारा बेचकर मुनाफाखोरी करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदकर वैश्विक बाजार में बेचकर लाभ कमा रहा है, जिससे वॉशिंगटन और बीजिंग दोनों में असंतोष है।
दरम्यान कैरोलिन लेविट के भारत पर लगाए ‘प्रतिबंध’ वाले बयान से नई दिल्ली में भौहें चढ़ने लगी है।आयत शुल्क (टेर्रिफ) और प्रतिबंध में लक्षणीय अंतर होता है, जिस वजह से सवाल उठने लगे है की क्या सचमुच अमेरिका ने भारत पर प्रतिबंध लगाए है?
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