अमेरिका ने विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों के लिए वीज़ा नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस प्रणाली को खत्म कर इसे निर्धारित समय सीमा (फिक्स्ड स्टे) से बदलने का प्रस्ताव रखा है।
नोटिस ऑफ प्रपोज़्ड रूल मेकिंग (NPRM) के तहत, DHS ने कहा है कि अब F (अकादमिक स्टूडेंट्स), J (एक्सचेंज विजिटर्स) और I (विदेशी मीडिया प्रतिनिधि) को अनिश्चितकालीन प्रवास की जगह एक तय समय के लिए ही प्रवेश दिया जाएगा। यदि किसी को इससे अधिक समय तक रहना है तो उसे सीधे DHS के पास एक्सटेंशन ऑफ स्टे (EOS) के लिए आवेदन करना होगा।
DHS ने स्पष्ट किया कि मौजूदा व्यवस्था में प्रवास की कोई तय समय सीमा न होने के कारण इमिग्रेशन अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के पर्याप्त अवसर नहीं मिलते कि गैर-प्रवासी केवल अनुमोदित गतिविधियों में संलग्न हैं।
अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों ने बताया कि केवल 2023 में 1.6 मिलियन F-1 स्टूडेंट्स, 5 लाख से अधिक J एक्सचेंज विजिटर्स, और 32,470 I वीज़ा होल्डर्स देश में दाखिल हुए। इनकी बढ़ती संख्या से निगरानी और सत्यापन में चुनौतियां आ रही हैं। DHS का कहना है कि नए नियम वीज़ा श्रेणियों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करेंगे और धोखाधड़ी को रोकने में मदद करेंगे।
F और J वीज़ा धारकों के लिए अधिकतम प्रवास अवधि चार साल तय होगी। पढ़ाई पूरी होने के बाद F-1 छात्रों को दी जाने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड घटाकर 30 दिन कर दी जाएगी। ग्रेजुएट लेवल F-1 छात्रों को बीच में प्रोग्राम बदलने पर प्रतिबंध होगा। I वीज़ा धारकों (विदेशी मीडिया प्रतिनिधि) के लिए प्रवास अवधि 240 दिन तक सीमित होगी, कुछ अपवादों को छोड़कर। विशेष रूप से चीन (People’s Republic of China) से जुड़े मामलों के लिए और कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
DHS का कहना है कि इन बदलावों से इमिग्रेशन अधिकारी समय-समय पर यह आकलन कर पाएंगे कि गैर-प्रवासी अपने वीज़ा की शर्तों और अमेरिकी इमिग्रेशन कानूनों का पालन कर रहे हैं या नहीं। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी मजबूत होगी।
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