ईरान युद्ध के कारण वैश्विक कच्चे तेल बाजार में बढ़ती अस्थिरता के कारण अमेरिका और साथी देश सकते में आगए है। बढ़ती तेल कीमतों पर नियंत्रण लाने के लिए अब अमेरिका ने रूसी तेल पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने का फैसला किया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार (12 मार्च) को समुद्र में पहले से मौजूद रूसी कच्चे तेल के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट देने की घोषणा की।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि यह छूट 11 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि के दौरान समुद्र में फंसे सैकड़ों मिलियन बैरल रूसी कच्चे तेल को खरीदारों तक पहुंचने की अनुमति दी जाएगी। ट्रम्प प्रशासन ने इस कदम को एक प्रकार का इमरजेंसी रिलीज़ बताया है, जिसका उद्देश्य ईरान युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण पैदा हुए वैश्विक ईंधन आपूर्ति संकट को कम करना है।
अमेरिकी घोषणा के तुरंत बाद रूस की प्रतिक्रिया भी सामने आई। मॉस्को के आर्थिक दूत किरिल दिमित्रिएव ने शुक्रवार (13 मार्च) को कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार रूस के तेल के बिना स्थिर नहीं रह सकता। उन्होंने टेलीग्राम पर लिखा, “संयुक्त राज्य अमेरिका वास्तव में स्पष्ट बात को स्वीकार कर रहा है: रूसी तेल के बिना वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर नहीं रह सकता।”
इसी बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें एशियाई बाजार में 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं और शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच ईरान ने मध्य-पूर्व के ऊर्जा संसाधनों पर हमले की चेतावनी दी है। तेहरान की सैन्य केंद्रीय संचालन कमान के एक प्रवक्ता ने बयान में कहा कि यदि ईरान के ऊर्जा ढांचे या बंदरगाहों पर हमला हुआ तो वे क्षेत्र के तेल और गैस संसाधनों को आग के हवाले कर देंगे।
गौरतलब है कि अमेरिका और G-7 देशों ने 2022 से रूस के तेल पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं। इन प्रतिबंधों में रूसी तेल की कीमत पर कैप लगाना और रूस की तथाकथित शैडो फ्लीट यानी बिना पहचान वाले जहाजों पर कार्रवाई शामिल है, जिनका इस्तेमाल निर्यातक प्रतिबंधों से बचने के लिए करते थे।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यूक्रेन युद्ध के लिए रूसी तेल निर्यात को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। हालांकि ईरान के साथ चल रहे युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों के 100 डॉलर के पार पहुंचने से वैश्विक आर्थिक दबाव बढ़ गया है, और अमेरिका को रूस के सामने हाथ फैलाना पड़ रहा है।
ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि यह अस्थायी कदम रूस को बड़ा आर्थिक लाभ नहीं देगा। उन्होंने कहा, “वैश्विक बाजार में मौजूदा आपूर्ति की पहुंच बढ़ाने के लिए ट्रेजरी अस्थायी अनुमति दे रही है, जिससे समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदा जा सके। यह सीमित और अल्पकालिक उपाय है और इससे रूसी सरकार को महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि उसकी ऊर्जा आय का अधिकांश हिस्सा तेल के निष्कर्षण के समय लगाए जाने वाले करों से आता है।”
हाल ही के यह घटनाक्रम दिखाते है की अमेरिका किस प्रकार विश्व की ईंधन आपूर्ति पर अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए उतारू है। यूक्रैन युद्ध के बाद रूसी तेल की बिक्री पर दबाव बनाने, वेनिजुएला की तेल आपूर्ति पर दबाव बनाने के लिए राष्ट्रपति का अपहरण, ईरान युद्ध की शुरुवात कर वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला को अमेरिका द्वारा ही अस्तव्यस्त करने के बाद रुसी तेल के लिए हाथ फैलाने तक अमेरिका का यह सफर उनकी योजनाओं में छुपे पाखंड, स्वार्थ और दमन की कई परते खोलते है।
यह भी पढ़ें:
प्रधानमंत्री 14 मार्च को बंगाल में छह पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों का उद्घाटन करेंगे!
काशी विश्वनाथ मंदिर में ईंधन कमी नहीं, श्रद्धालुओं को मिलता प्रसाद लगातार!
इराक में ऊपर अमेरिकी वायुसेना का KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान दुर्घटनाग्रस्त



