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गोल्ड में कैरेट क्या होता है कितने प्रकार जानें शुद्धता मापने का तरीका

सोना खरीदते समय अक्सर लोग 'कैरेट' शब्द सुनते हैं, लेकिन बहुत से खरीदार और निवेशक इसका सही मतलब नहीं जानते।

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हमारे देश में सोना सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निवेश और सुरक्षित संपत्ति का भी बड़ा माध्यम माना जाता है। सोना खरीदते समय अक्सर लोग ‘कैरेट’ शब्द सुनते हैं, लेकिन बहुत से खरीदार और निवेशक इसका सही मतलब नहीं जानते। सोने की शुद्धता, कीमत और गुणवत्ता को समझने के लिए कैरेट की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

दरअसल, ‘कैरेट’ सोने की शुद्धता मापने की इकाई होती है। यह बताता है कि किसी गहने या सोने के सिक्के में कितना शुद्ध सोना मिला हुआ है। कैरेट की अधिकतम सीमा 24 होती है। 24 कैरेट का मतलब होता है कि सोना लगभग पूरी तरह शुद्ध है।

सोने में आमतौर पर चार तरह के कैरेट ज्यादा प्रचलित हैं। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है और इसमें लगभग 99.9 प्रतिशत सोना होता है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर सिक्के और बिस्किट बनाने में होता है।

वहीं, 22 कैरेट सोना गहनों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसमें करीब 91.6 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है, बाकी धातुएं मजबूती के लिए मिलाई जाती हैं।

18 कैरेट सोने में लगभग 75 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है और यह डिजाइनर गहनों में इस्तेमाल किया जाता है। जबकि, 14 कैरेट सोने में करीब 58.5 प्रतिशत शुद्ध सोना होता है, जो हल्के और सस्ते गहनों के लिए उपयोग में आता है।

कैरेट जितना ज्यादा होगा, सोना उतना ही महंगा होगा। उदाहरण के तौर पर 24 कैरेट सोने की कीमत 22 कैरेट से ज्यादा होती है, क्योंकि उसमें शुद्ध सोने की मात्रा अधिक होती है। यही कारण है कि निवेश के लिए लोग 24 कैरेट सोना पसंद करते हैं, जबकि गहनों के लिए 22 कैरेट या उससे कम के सोने का इस्तेमाल होता है, क्योंकि 24 कैरेट सोना बहुत नरम होता है, जिसका उपयोग ज्वेलरी में नहीं हो पाता।

जानकारों के मुताबिक, अगर खरीदार कैरेट की जानकारी नहीं रखता, तो उसे कम शुद्धता वाला सोना ऊंचे दाम में दिया जा सकता है। वहीं, निवेशकों के लिए यह जरूरी है क्योंकि निवेश में शुद्धता जितनी ज्यादा होगी, उतनी ही बेहतर कीमत भविष्य में मिल सकती है। गलत कैरेट का सोना लेने से नुकसान होने की संभावना रहती है।

अगर सोने की शुद्धता जांचने की बात करें तो, इसके लिए सबसे भरोसेमंद तरीका हॉलमार्क होता है। भारत में भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा हॉलमार्किंग की जाती है। हॉलमार्क वाले सोने पर कैरेट, शुद्धता का प्रतिशत और पहचान चिह्न अंकित होता है।

इसके अलावा ज्वैलरी की दुकान पर कैरेट मीटर मशीन से भी सोने की शुद्धता जांची जा सकती है। जरूरत पड़ने पर सोने की प्रयोगशाला जांच भी कराई जा सकती है।

जानकारों का कहना है कि सोना खरीदते या उसमें निवेश करते समय सिर्फ डिजाइन या कीमत ही नहीं, बल्कि उसकी शुद्धता को समझना भी जरूरी है। कैरेट की सही जानकारी, हॉलमार्क की पहचान और शुद्धता की जांच से खरीदार और निवेशक दोनों खुद को नुकसान से बचा सकते हैं और सुरक्षित सौदा कर सकते हैं।

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