वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी सेना की 250वीं वर्षगांठ पर आयोजित सैन्य परेड को लेकर एक बड़ी राजनीतिक बहस भारत में खड़ी हो गई थी। दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल असीम मुनीर को इस भव्य आयोजन में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस पर व्हाइट हाउस ने स्पष्ट रूप से इन दावों को खारिज करते हुए कहा, “यह खबर झूठी है। किसी भी विदेशी सैन्य नेता को आमंत्रित नहीं किया गया।”
हालांकि इस कथित न्योते को लेकर भारत में पहले ही राजनीतिक तूफान उठ चुका था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा, “यह खबर भारत के लिए एक बड़ा रणनीतिक और कूटनीतिक झटका है, खासकर तब जब हाल ही में ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के तहत भारत ने पाकिस्तान और POK में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं।”
विवाद बढ़ने पर बीजेपी ने कांग्रेस और जयराम रमेश पर निशाना साधा।बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर कहा,”प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपनी घृणा में अंधे होकर जयराम रमेश ने एक झूठी खबर को बढ़ावा दिया और देश की विदेश नीति पर सवाल खड़े कर दिए, जिससे पाकिस्तान समर्थित नैरेटिव को बल मिला।”
गौरतलब है कि यह सैन्य परेड 14 जून को अमेरिका की सेना स्थापना दिवस (1775) के उपलक्ष्य में हुई, जो संयोग से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का 79वां जन्मदिन भी था। ट्रंप ने इस समारोह में सलामी ली। इस दुर्लभ सैन्य प्रदर्शन में हजारों सैनिक, टैंक, हेलीकॉप्टर, पैराशूट ब्रिगेड और सैन्य विमानों की फ्लाईपास्ट शामिल हुए। अमेरिका में इस तरह की भव्य सैन्य परेड आमतौर पर नहीं होती—इससे पहले ऐसी परेड 1991 में खाड़ी युद्ध (ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म) के बाद देखी गई थी।
इस पूरे प्रकरण ने भारत-अमेरिका-पाकिस्तान के त्रिकोणीय रिश्तों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया था। हालांकि व्हाइट हाउस की सफाउ और कार्यक्रम के बाद स्थिति स्पष्ट हो चुकी है, लेकिन यह प्रकरण दिखाता है कि वैश्विक मंच पर सूचनाएं कितनी तेजी से राजनीतिक रंग ले सकती हैं।
यह घटना न केवल भारत की आतंरिक राजनीति में टकराव को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि राजनयिक संकेतों की सटीक व्याख्या कितनी आवश्यक है—वरना एक अफवाह भी कूटनीति की जमीन हिला सकती है।
यह भी पढ़ें:
15 जून 2025 का विस्तृत राशिफल: जानें कैसा होगा करियर और आर्थिक स्थिती



