डब्ल्यूएचओ ने कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया

डब्ल्यूएचओ ने कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया

WHO declares Ebola outbreak in Congo and Uganda a global public health emergency

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रविवार को घोषणा की कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैला इबोला प्रकोप “अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल” है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि बंडिबुग्यो वायरस के कारण फैला इबोला प्रकोप महामारी आपातकाल की श्रेणी में नहीं आता है।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा के नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि दोनों देशों ने इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक और सख्त कदम उठाने की प्रतिबद्धता दिखाई है। उन्होंने अन्य देशों के लिए इस प्रकोप से उत्पन्न जोखिम का ईमानदारी से आकलन साझा करने के लिए भी दोनों देशों की सराहना की, जिससे वैश्विक समुदाय को आवश्यक तैयारियां करने का अवसर मिला।

महानिदेशक ने अपने निर्णय में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा द्वारा साझा की गई जानकारी, वैज्ञानिक सिद्धांतों, उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों और अन्य प्रासंगिक सूचनाओं पर विचार किया। साथ ही मानव स्वास्थ्य पर जोखिम, बीमारी के अंतरराष्ट्रीय प्रसार और अंतरराष्ट्रीय यातायात पर संभावित प्रभाव का भी आकलन किया गया।

इससे पहले, अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार इतुरी प्रांत में सैकड़ों संदिग्ध मामले सामने आए थे। समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय जैव-चिकित्सा अनुसंधान संस्थान द्वारा किए गए प्रारंभिक परीक्षणों में 20 में से 13 नमूनों में वायरस की पुष्टि हुई।

अफ्रीका सीडीसी ने कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय और राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान के साथ हुई चर्चाओं का हवाला देते हुए बयान में कहा कि अब तक लगभग 246 संदिग्ध मामले और 65 मौतें दर्ज की गई हैं। इनमें अधिकतर मामले मोंगवालू और र्वामपारा क्षेत्रों में पाए गए, जबकि पुष्टि किए गए मामलों में चार मौतें हुई हैं। बुनिया में भी संदिग्ध मामलों की सूचना मिली है।

अफ्रीका सीडीसी ने चेतावनी दी है कि शहरी क्षेत्रों, लोगों की आवाजाही, खनन गतिविधियों, असुरक्षा और युगांडा तथा दक्षिण सूडान की निकटता के कारण संक्रमण के और फैलने का खतरा अधिक है।

एजेंसी ने कहा कि वह शुक्रवार दोपहर कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान के स्वास्थ्य अधिकारियों तथा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ एक आपात बैठक आयोजित कर रही है, ताकि सीमा-पार समन्वय, निगरानी और प्रतिक्रिया प्रयासों को मजबूत किया जा सके।

यह भी पढ़ें:

सिंधु जल संधि पर हेग कोर्ट के फैसले को भारत ने किया खारिज, कहा- “अवैध, शून्य और निरर्थक”

नीट पेपर लीक की जांच महाराष्ट्र के नांदेड़ तक पहुंची, सीबीआई ने की ताबड़तोड़ छापेमारी! 

“दुनिया आपदाओं के दशक में कर रही है प्रवेश”

Exit mobile version