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Sunday, February 8, 2026
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महिलाओं में कैल्शियम की कमी बन रही है बड़ी चिंता, बढ़ रहा ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा!

गर्भावस्था और स्तनपान के समय महिला का शरीर शिशु को पोषण देने के लिए अपने अंदर जमा कैल्शियम का उपयोग करता है। अगर इस दौरान आहार में पर्याप्त कैल्शियम न लिया जाए, तो यह कमी और गंभीर हो सकती है।

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घर और ऑफिस की दोहरी जिम्मेदारियों को निभाती आधुनिक महिलाएं अक्सर अपनी सेहत को पीछे छोड़ देती हैं। इसका सबसे बड़ा असर उनकी हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं में कैल्शियम की कमी तेजी से देखी जा रही है, और यही आगे चलकर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी की वजह बन रही है।

कैल्शियम शरीर के लिए बेहद अहम है। यह सिर्फ हड्डियों और दांतों को मजबूत ही नहीं बनाता, बल्कि दिल की धड़कन को नियंत्रित करने, नसों के सुचारु कामकाज और मांसपेशियों को ताकत देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि जब तक महिलाएं कैल्शियम की कमी पर ध्यान देती हैं, तब तक अक्सर देर हो चुकी होती है।

अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट के अनुसार, कैल्शियम की कमी समय रहते पूरी न करने पर हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, लगातार थकान बनी रहती है और हल्की चोट लगने पर भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि महिलाओं में कैल्शियम की कमी के कई कारण होते हैं। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, खासकर मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घट जाता है। यह हार्मोन हड्डियों की मजबूती के लिए बेहद जरूरी होता है।

इसके अलावा, गर्भावस्था और स्तनपान के समय महिला का शरीर शिशु को पोषण देने के लिए अपने अंदर जमा कैल्शियम का उपयोग करता है। अगर इस दौरान आहार में पर्याप्त कैल्शियम न लिया जाए, तो यह कमी और गंभीर हो सकती है।

अनियमित खानपान भी एक बड़ी वजह है। दूध, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां और कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थों की कमी से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। वहीं आजकल की जीवनशैली में लंबे समय तक बैठे-बैठे काम करना, व्यायाम न करना, अत्यधिक चाय और कॉफी पीना तथा प्रोसेस्ड फूड खाना भी शरीर से कैल्शियम को कम कर देता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि कैल्शियम की कमी के कुछ स्पष्ट संकेत होते हैं। हड्डियों और जोड़ों में लगातार दर्द बने रहना, मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन होना, दांतों का कमजोर होना या टूटना और हर समय थकान महसूस करना इसके प्रमुख लक्षण हैं। इन्हें शुरुआती चेतावनी के संकेत मानकर समय रहते गंभीरता से लेना जरूरी है।

डॉक्टरों का कहना है कि महिलाओं को अपनी डाइट में कैल्शियम से भरपूर चीजें जरूर शामिल करनी चाहिए। दूध, दही, पनीर और छाछ जैसे डेयरी उत्पाद रोजाना का हिस्सा बनने चाहिए। पालक, मेथी, बथुआ और सरसों का साग जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां भी कैल्शियम की अच्छी आपूर्ति करती हैं। वहीं बादाम, अंजीर, तिल और अलसी जैसे सूखे मेवे और बीज हड्डियों को मजबूती देते हैं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से कैल्शियम और विटामिन डी सप्लीमेंट भी लिए जा सकते हैं।

कुछ सरल जीवनशैली की आदतें कैल्शियम की कमी से बचाव में मदद करती हैं। रोजाना कम से कम 15 मिनट धूप में बैठना शरीर को प्राकृतिक विटामिन डी देता है, जिससे कैल्शियम का अवशोषण बेहतर होता है। योग और नियमित व्यायाम से हड्डियां मजबूत बनती हैं। इसके अलावा संतुलित आहार और पर्याप्त प्रोटीन का सेवन हड्डियों को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महिलाएं समय रहते कैल्शियम पर ध्यान दें, तो न सिर्फ हड्डियों की बीमारियों से बचा जा सकता है, बल्कि उम्र बढ़ने के बाद भी जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।

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