जिम की महंगी सदस्यता और जटिल वर्कआउट्स के दौर में प्लैंक एक ऐसा सरल, उपकरण-रहित व्यायाम है, जो कम समय में ठोस नतीजे देता है। प्लैंक एक आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज है, जिसमें पुश-अप की ऊपरी स्थिति में शरीर को स्थिर रखा जाता है। रोज़ाना सिर्फ़ 3 मिनट तक प्लैंक करने की आदत अगर 3 महीने तक कायम रखी जाए, तो इससे शरीर में ताकत, फुर्ती, बॉडी पोस्चर, मजबूती, और संतुलन में उल्लेखनीय बदलाव देखे जा सकते हैं। शुरुआत में लोगों के लिए सुलभ है और फिटनेस के शौकीन लोगों के लिए भी पर्याप्त चुनौतीपूर्ण माना गया व्यायाम है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्लैंक केवल पेट की मांसपेशियों तक सीमित नहीं है, यह ट्रांसवर्स एब्डोमिनिस (डीप कोर स्टेबलाइज़र),शरीर में तिरछी मांसपेशियां, कंधे, छाती, पीठ, नितंब की मांसपेशियांऔर पैरों की मांसपेशियों को एक साथ सक्रिय करता है। इस तरह का फुल-बॉडी एंगेजमेंट मांसपेशियों की सहनशक्ति और स्थिरता बढ़ाता है, जिसका सीधा फायदा रोज़मर्रा के कामों में होता है। जैसे लंबे समय तक बैठना, वजन उठाना या सही मुद्रा बनाए रखना यह सभी सुलभ हो जातें है।
शोध भी इसके लाभों की पुष्टि करते हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि 12 हफ्तों तक नियमित प्लैंक अभ्यास करने से श्वसन क्षमता में सुधार होता है, जिसमें फेफड़ों की कार्यक्षमता में 27 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई। इसके साथ ही ग्रिप स्ट्रेंथ, कार्डियो एंड्योरेंस और इम्यून सेल गतिविधि में भी सुधार दर्ज किया गया है, जहां नेचुरल किलर सेल्स में लगभग 30 प्रतिशत तक वृद्धि पाई गई। आइसोमेट्रिक होल्ड्स जैसे प्लैंक ब्लड प्रेशर को कम करने, कोर स्टेबिलिटी बढ़ाने और चोट के जोखिम को घटाने में भी सहायक माने जाते हैं।
तीन महीने की इस आदत को अगर चरणों में देखा जाए, तो पहले महीने में सही फॉर्म और निरंतरता पर ज़ोर रहता है। शुरुआत में 3 मिनट कठिन लग सकते हैं, इसलिए इसे छोटे सेट्स में बांटा जा सकता है। दूसरे महीने तक मांसपेशियों की सहनशक्ति बढ़ती है, संतुलन बेहतर होता है और कमर या पीठ में होने वाली हल्की तकलीफ कम महसूस होती है। तीसरे महीने के अंत तक कोर स्ट्रेंथ काफ़ी मजबूत हो जाती है, पोस्चर में स्पष्ट सुधार दिखता है और गर्दन-कंधों के तनाव में कमी आती है।

सफलता और सुरक्षित रहने के लिए टिप्स
अपना फॉर्म सही करें: शरीर सीधा, कोर टाइट, ग्लूट्स एंगेज्ड रखें—झुकने या कमर मोड़ने से बचें।
धीरे-धीरे आगे बढ़ें: अगर ज़रूरत हो तो कम समय तक होल्ड करने से शुरू करें; चुनौती के लिए वेरिएशन जोड़ें।
अलग-अलग तरह के प्लैंक करें: अलग-अलग मसल्स पर असर डालने के लिए फोरआर्म, साइड या वॉकिंग प्लैंक ट्राई करें।
लाइफ़स्टाइल की आदतों के साथ करें: बॉडी टोनिंग के लिए, हेल्दी खाने के साथ इसे करें; प्लैंक मेटाबॉलिज्म को थोड़ा बढ़ाते हैं लेकिन कैलोरी बहुत ज़्यादा बर्न नहीं करते।
जोखिमों पर ध्यान दें: अगर आपको दर्द महसूस हो (सामान्य कोशिश से ज़्यादा) तो रुक जाएं। गलत फॉर्म से पीठ में खिंचाव का खतरा होता है—अगर आपको पहले से कोई समस्या है तो डॉक्टर से सलाह लें।
रोज़ प्लैंकिंग करने से अनुशासन और दिमागी शांति भी आती है। होल्ड के दौरान वह शांत फोकस तनाव कम कर सकता है और मानसिक मज़बूती बढ़ा सकता है।
कुल मिलाकर, रोज़ाना 3 मिनट का प्लैंक किसी चमत्कारी बदलाव का वादा नहीं करता, लेकिन यह दिखाता है कि छोटे और निरंतर प्रयास लंबे समय में बड़े फायदे दे सकते हैं। बेहतर ताकत, संतुलन, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ यह व्यायाम एक स्थायी और व्यवहारिक फिटनेस आदत के रूप में उभरता है, जिसे किसी भी व्यस्त दिनचर्या में आसानी से अपनाया जा सकता है।
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