बदलते मौसम में सर्दी-खांसी, जोड़ों का दर्द या फिर मांसपेशियों की सूजन जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में लोग अब प्राकृतिक उपचारों की ओर रुख कर रहे हैं। इन्हीं में एक अत्यंत लाभकारी औषधीय पेड़ है ‘नीलगिरी’ जिसे यूकेलिप्टस (Eucalyptus) के नाम से भी जाना जाता है। इसका तेल घरेलू समस्याओं से लेकर गंभीर दर्द तक में राहत देने वाला माना जाता है।
नीलगिरी के तेल की कुछ बूंदें गर्म पानी में डालकर उसकी भाप लेने से बंद नाक खुलती है और बलगम ढीला होकर आसानी से बाहर निकल जाता है। इसमें मौजूद सिनिओल (Cineole) तत्व श्वसन तंत्र को साफ करता है और सर्दी, खांसी, जुकाम जैसी समस्याओं में राहत देता है।
अमेरिकी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, नीलगिरी के तेल में पाए जाने वाले सिनिओल और अल्फा-पाइनिन जैसे रसायन सूजन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं। यह तेल विशेष रूप से गठिया, साइटिका और मांसपेशियों के दर्द में फायदेमंद होता है। मालिश के दौरान इस तेल को किसी कैरियर ऑयल (जैसे नारियल या बादाम तेल) के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है।
नीलगिरी का तेल एंटीसेप्टिक और एंटीफंगल गुणों से भरपूर होता है, जो त्वचा पर होने वाले मुंहासे, फोड़े-फुंसी और फंगल इंफेक्शन को ठीक करता है। यह घावों पर संक्रमण को रोकने और उन्हें जल्दी भरने में भी मदद करता है। इसकी तेज़ सुगंध मच्छरों और कीटों को दूर रखती है। साथ ही यह मानसिक रूप से भी फायदेमंद है। इसकी अरोमाथेरेपी (सुगंध चिकित्सा) में उपयोग से मन शांत होता है, तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है।
नीलगिरी का तेल जितना फायदेमंद है, उतनी ही सावधानी से इसका इस्तेमाल करना जरूरी है,
- इसे कभी भी सीधे त्वचा पर न लगाएं, बल्कि किसी कैरियर ऑयल के साथ मिलाकर ही प्रयोग करें।
- आंखों के पास या आंखों में लगाने से बचें, क्योंकि इसकी तीव्र गंध जलन पैदा कर सकती है।
- अत्यधिक मात्रा में सेवन या प्रयोग से उल्टी, चक्कर या एलर्जी हो सकती है।
- बच्चों और गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर की सलाह से ही इसका उपयोग करना चाहिए।
नीलगिरी का तेल प्राकृतिक औषधि के रूप में बेहद उपयोगी है—खासकर उन लोगों के लिए जो दवाइयों से परहेज़ करते हैं और प्राकृतिक समाधान चाहते हैं। हालांकि, इसका इस्तेमाल सावधानीपूर्वक करना चाहिए ताकि इसके सभी फायदे बिना किसी साइड इफेक्ट के मिल सकें।



