भारतीय नौसेना ने पेश किया एआई आधारित समुद्री निगरानी सिस्टम ‘ट्राइडेंट-समुद्रा’

भारतीय नौसेना ने पेश किया एआई आधारित समुद्री निगरानी सिस्टम ‘ट्राइडेंट-समुद्रा’

Indian Navy introduces AI-based maritime surveillance system 'Trident-Samudra'

भारतीय नौसेना ने समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उन्नत एआई-आधारित समुद्री निगरानी प्रणाली ट्राइडेंट-समुद्रा का अनावरण किया है। इस प्रणाली को नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान प्रदर्शित किया गया था। नौसेना के अनुसार यह तकनीक भारतीय महासागरीय क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों की निगरानी को नई दिशा दे सकती है।

इस परियोजना को तकनीकी साझेदारों के सहयोग से विकसित किया गया है, जिनमेंब्लर्ग्स इनोवेशन भी शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रणाली निगरानी, सुरक्षा और परिचालन दक्षता को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

रीयल-टाइम निगरानी और खुफिया विश्लेषण:

‘ट्राइडेंट-समुद्रा’ को एक उन्नत इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) प्लेटफॉर्म के रूप में डिजाइन किया गया है। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित एल्गोरिदम का उपयोग किया गया है, जो समुद्री गतिविधियों की पहचान, ट्रैकिंग और विश्लेषण वास्तविक समय में कर सकता है। यह प्रणाली वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही से लेकर संदिग्ध सैन्य गतिविधियों तक का विश्लेषण कर असामान्य पैटर्न को तेजी से चिन्हित कर सकती है।

सिस्टम विभिन्न सेंसर, उपग्रहों और समुद्र के भीतर लगाए गए उपकरणों से प्राप्त बड़े डेटा सेट का विश्लेषण कर व्यापक परिचालन तस्वीर तैयार करता है। इससे नौसेना और तटरक्षक बल को समुद्री क्षेत्र की स्थिति की अधिक सटीक जानकारी मिलती है।

अंडरवाटर सुरक्षा पर विशेष फोकस

नौसेना के अनुसार यह प्रणाली समुद्र के भीतर होने वाली गतिविधियों की निगरानी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हाल के वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में पनडुब्बी गतिविधियों में वृद्धि को देखते हुए यह तकनीक विशेष रूप से उपयोगी मानी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि यह विदेशी पनडुब्बियों की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करेगी, खासकर बंगाल की खाड़ी और अंडमान व नोकोबार द्वीप समूह के आसपास के रणनीतिक समुद्री क्षेत्रों में।

यह प्रणाली भारतीय नौसेना के आधुनिक युद्धपोतों के साथ भी एकीकृत की जा सकती है, जिनमें INS सूरत जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। नौसेना का कहना है कि इसका स्वदेशी विकास ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप है, जिससे विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी।

ट्राइडेंट-समुद्रा को नौसेना के सूचना नेटवर्क के साथ भी जोड़ा गया है, जिसमें सूचना प्रबंधन और विश्लेषण केंद्र तथा समुद्री संचार उपग्रह GSAT-7 शामिल हैं। इससे विभिन्न स्रोतों से मिलने वाली सूचनाओं को एकीकृत कर एक मजबूत निगरानी प्रणाली तैयार की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रणाली भविष्य में ड्रोन झुंड, मानवरहित अंडरवाटर वाहनों और अन्य असममित खतरों से निपटने में भी मदद कर सकती है। हालांकि एआई आधारित प्रणालियों में साइबर सुरक्षा चुनौतियां भी होती हैं, जिनसे निपटने के लिए नौसेना ने स्वदेशी एन्क्रिप्शन और उन्नत सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाए हैं।

नौसेना का मानना है कि ट्राइडेंट-समुद्रा के उपयोग से भारत की लगभग 7,500 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा और विशेष आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।

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