योग शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक शांति का भी आधार है। इस दिशा में ‘नटराजासन’ एक प्रभावशाली और शक्तिशाली योग मुद्रा मानी जाती है, जिसे ‘डांसर पोज़’ के नाम से भी जाना जाता है। यह आसन भगवान शिव के नटराज स्वरूप से प्रेरित है और शरीर के संतुलन, लचीलापन व मानसिक एकाग्रता को बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी है।
नटराजासन योग में शरीर की स्थिति एक नृत्य मुद्रा जैसी होती है। यह आसन संतुलन, लचीलापन और शक्ति को एक साथ बढ़ाता है। इसे करते समय व्यक्ति एक पैर पर खड़ा होकर दूसरे पैर को पीछे की ओर मोड़ता है और हाथ से उसे पकड़कर ऊपर उठाता है, जबकि दूसरा हाथ सामने की ओर सीधा रहता है।
कैसे करें नटराजासन?
नटराजासन को डांसर पोज के नाम से भी जाना जाता है, योग की एक अत्यंत प्रभावशाली मुद्रा है जो शरीर को लचीलापन, संतुलन और मानसिक एकाग्रता प्रदान करती है। यह आसन भगवान शिव के नटराज स्वरूप से प्रेरित है और योग में इसकी प्रतिष्ठा एक ऐसी मुद्रा के रूप में है जो संपूर्ण शरीर पर गहरा प्रभाव डालती है।
इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले व्यक्ति को शांत और समतल स्थान पर खड़ा होना चाहिए। फिर दाहिने पैर को धीरे-धीरे पीछे की ओर मोड़कर उसी तरफ के हाथ से टखने को पकड़ें और शरीर का संतुलन बनाते हुए बायां हाथ सामने की ओर फैलाएं।
धीरे-धीरे उस मोड़े हुए पैर को ऊपर की ओर खींचें और शरीर को आगे झुकाकर इस मुद्रा में कुछ समय तक स्थिर रहें। इस दौरान गहरी सांस लें और मन को शांत रखें। लगभग 15 से 20 सेकंड बाद धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएं और फिर यही प्रक्रिया दूसरे पैर से दोहराएं। यह मुद्रा करते समय शरीर का संतुलन बनाए रखना आवश्यक होता है, जिससे ध्यान की शक्ति बढ़ती है और मानसिक स्थिरता आती है।
नटराजासन के अद्भुत फायदे:
इस आसन के नियमित अभ्यास से मांसपेशियों को मजबूती मिलती है, विशेषकर जांघों, पीठ और पैरों की मांसपेशियां सशक्त होती हैं। साथ ही, यह रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाता है जिससे कमर दर्द जैसी समस्याएं काफी हद तक कम हो जाती हैं। नटराजासन शरीर में रक्त संचार को भी बेहतर करता है, जिससे हृदय मजबूत होता है और पूरे शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ता है।
यही कारण है कि यह योगासन थकान और कमजोरी को दूर करता है। नटराजासन न केवल शारीरिक रूप से लाभकारी है, बल्कि मानसिक रूप से भी अत्यंत प्रभावशाली है। इसे करने से तनाव, चिंता और मानसिक थकान में राहत मिलती है। मन स्थिर होता है और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है, जो छात्रों और पेशेवरों दोनों के लिए बेहद उपयोगी है। इसके अतिरिक्त, रक्त संचार बेहतर होने से त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनती है।
नटराजासन जीवन में आंतरिक शक्ति, शांति और संतुलन को बढ़ाने का एक बेहतरीन माध्यम है। यह न सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन को भी सशक्त और स्थिर बनाता है। इस मुद्रा का नियमित अभ्यास करने से न केवल योग की उच्च स्थिति प्राप्त होती है, बल्कि जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है।
नटराजासन को युवा, वयस्क और वरिष्ठ नागरिक भी कर सकते हैं, बशर्ते उन्हें कोई गंभीर पीठ या संतुलन संबंधी समस्या न हो। शुरुआत में इसे किसी प्रशिक्षित योगाचार्य की देखरेख में करना उचित होता है।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में जहां मानसिक तनाव, पीठ दर्द और जीवन असंतुलन आम हो चुका है, वहां नटराजासन एक संजीवनी की तरह है। यह न केवल शारीरिक मजबूती देता है, बल्कि मन और मस्तिष्क को भी स्थिर और शांत बनाता है।
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