इंद्रियों पर विजय और मानसिक स्पष्टता के लिए अचूक है योग की ‘योनि मुद्रा’

इंद्रियों पर विजय और मानसिक स्पष्टता के लिए अचूक है योग की ‘योनि मुद्रा’

Yoga's 'Yoni Mudra' is infallible for conquering the senses and achieving mental clarity.

आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी में योग और ध्यान का महत्व दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में ऐसी कई मुद्राएं हैं, जो मन को शांत करने में मदद करती हैं। इन्हीं में से एक है ‘योनि मुद्रा’। योनि मुद्रा को योग शास्त्रों में ध्यान की तैयारी के लिए बहुत उपयोगी माना गया है। यह मुद्रा इंद्रियों को नियंत्रित करने के साथ आंतरिक शांति भी प्रदान करती है।

 

इसका नाम संस्कृत भाषा से लिया गया है। ‘योनि’ का अर्थ है, ‘गर्भ’ या ‘सृष्टि का मूल स्रोत’ और ‘मुद्रा’ का मतलब है ‘हाथों की विशेष स्थिति’। आयुष मंत्रालय ने योनि मुद्रा को मन को शांत करने वाला बताया है। उनके अनुसार, इसके करने से तनाव दूर होता है और मन को एक शांति मिलती है, जब व्यक्ति अपनी सांसों, विचारों और शरीर की ऊर्जा पर ध्यान देता है, तो उसका तनाव धीरे-धीरे कम हो जाता है और मन को सुकून मिलता है।

इससे शरीर को कई तरह के रोगों से लड़ने की शक्ति (इम्यून सिस्टम) मजबूत होती है। योनि मुद्रा का नियमित अभ्यास करने से शरीर में ऊर्जा का संतुलन बना रहता है और छोटी-मोटी बीमारियों से बचाव करने में मदद मिलती है।

‘योनि मुद्रा’ का संबंध शरीर के स्वाधिष्ठान चक्र (नाभि के नीचे पेडू) से होता है, जो मूलाधार चक्र (रीढ़ की हड्डी के निचले सिरे ‘टेलबोन’ के पास स्थित ) के थोड़ा ऊपर होता है। स्वाधिष्ठान चक्र हमारे शरीर में नाभि के ठीक नीचे होता है। यह हमारी रचनात्मकता और भावनाओं और आनंद से जुड़ा होता है। यही ऊर्जा हमें जीवन में आगे बढ़ने और कुछ नया करने की प्रेरणा देती है।

इस मुद्रा को करते समय हाथों की उंगलियों से एक विशेष आकृति बनाते हैं। ऐसा करने से शरीर की ऊर्जा पेट के निचले हिस्से में केंद्रित होती है। यह ऊर्जा स्वाधिष्ठान चक्र को सक्रिय करती है, जिससे शरीर और मन की थकान दूर होती है।

जब हम योनि मुद्रा करते हैं, तो हाथों की एक खास स्थिति बनाते हैं, जिससे शरीर की ऊर्जा पेट के क्षेत्र में केंद्रित होती है। इससे इस ऊर्जा को संतुलित करने, ठीक करने और जागृत करने में मदद मिलती है। योनि मुद्रा का अभ्यास करने से हम अपने अंदर की इसी शक्ति से जुड़ते हैं। इससे मन की रुकावटें दूर होती हैं और आत्मविश्वास बढ़ता है।

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