भारत के रक्षा तकनीक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति के तहत स्टार्टअप पाणिनीयन इंडिया ने एआई आधारित ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन SVAYATT-M1 का विकास किया है। यह एक उन्नत कोलाबोरेटिव कॉम्बैट एरियल वेहिकल (CCAV) है, जिसे मानव संचालित लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर उच्च जोखिम वाले युद्ध क्षेत्रों में संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय वायुसेना की क्षमताओं को बढ़ाना और आधुनिक युद्धक्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना है।
साल 2020 में स्थापित पाणिनीयन इंडिया की स्थापना DRDO और HAL के पूर्व विशेषज्ञों ने की थी। कंपनी वर्तमान में 50,000 वर्ग फुट के अत्याधुनिक परिसर से काम कर रही है, जिसमें सिमुलेशन लैब, विंड टनल और कंपोजिट मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं शामिल हैं। स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कंपनी को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के MEITY TIDE 2.0 कार्यक्रम के तहत अनुदान भी प्राप्त हुआ है। कंपनी के साथ 200 से अधिक इंजीनियर विभिन्न रक्षा परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।
SVAYATT-M1 को कम लागत वाले ‘लॉयल विंगमैन’ के रूप में विकसित किया गया है, जो मानव संचालित लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर मिशन को अंजाम दे सकता है। यह प्लेटफॉर्म विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है जहां दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली अत्यधिक मजबूत होती है। इसका लो-ऑब्जर्वेबल एयरफ्रेम रडार और इंफ्रारेड सिग्नेचर को कम करता है, जिससे यह दुश्मन के क्षेत्र में गुप्त रूप से प्रवेश करने में सक्षम बनता है।
इस ड्रोन में पाणिनीयन द्वारा विकसित इन-हाउस टर्बोफैन इंजन लगाया गया है। साथ ही यह STOBAR कैरियर ऑपरेशन को भी सपोर्ट करता है, जिससे नौसेना के लिए भी इसकी उपयोगिता बढ़ जाती है। हालांकि फिलहाल इसके आकार, वजन, गति या रेंज जैसी विस्तृत तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है क्योंकि यह अभी एक कॉन्सेप्चुअल प्रोटोटाइप के रूप में विकसित किया जा रहा है।
SVAYATT-M1 की सबसे बड़ी खासियत इसका उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मिशन सिस्टम है। ‘कलमन इंटेल’ तकनीक के माध्यम से यह मिशन प्लानिंग, लक्ष्य चयन, स्वार्म कोऑर्डिनेशन और जीपीएस के बिना भी नेविगेशन करने में सक्षम है। इसके जरिए यह मानव संचालित विमानों जैसे Su-30MKI, राफेल और भविष्य के AMCA के साथ मिलकर ‘मैनड-अनमैनड टीमिंग’ (MUM-T) में काम कर सकता है।
इस प्लेटफॉर्म की मॉड्यूलर ‘प्लग-एंड-प्ले’ संरचना इसे विभिन्न प्रकार के मिशनों के लिए अनुकूल बनाती है। इसमें निगरानी और टोही (ISR), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, एंटी-शिप स्ट्राइक, एयर-टू-ग्राउंड हमले और सीमित अवधि वाले विशेष मिशनों के लिए अलग-अलग पेलोड लगाए जा सकते हैं। यह ड्रोन दुर्गम इलाकों में ‘टेरेन-हगिंग फ्लाइट’, अनुकूल खतरा प्रतिक्रिया और नेटवर्क आधारित संचालन की क्षमता भी रखता है, जिससे वास्तविक युद्ध स्थितियों में इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे प्लेटफॉर्म भारतीय वायुसेना को पायलटों की कमी की चुनौती से निपटने, हमलों की सीमा बढ़ाने और जोखिम वाले मिशनों में मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेंगे। इसके अलावा यह प्रणाली भारत की रक्षा निर्यात रणनीति के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, विशेषकर वियतनाम जैसे मित्र देशों के साथ सहयोग में।
SVAYATT-M1 के साथ ही कंपनी Svayatt TD-1 लक्ष्य डिकॉय सिस्टम और PA-LW50 विंगमैन ड्रोन जैसे अन्य प्लेटफॉर्म पर भी काम कर रही है। इन प्रणालियों के विकास में डिजिटल ट्विन तकनीक, सॉफ्टवेयर-इन-द-लूप (SIL) और हार्डवेयर-इन-द-लूप (HIL) परीक्षण जैसी आधुनिक प्रक्रियाओं का उपयोग किया जा रहा है, जिससे स्वायत्त युद्ध प्रणाली के क्षेत्र में भारत की क्षमताएं तेजी से मजबूत हो रही हैं।
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