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Saturday, January 3, 2026
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अलीएक्सप्रेस पर भगवान जगन्नाथ की तस्वीर वाला ‘पायदान’ बेचने पर बवाल!

ओडिशा सहित दुनियाभर में हिन्दू श्रद्धालुओं में रोष

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चीन की ई-कॉमर्स कंपनी अलीएक्सप्रेस ने भगवान जगन्नाथ की तस्वीर वाला ‘डोरमैट’ (पायदान) ऑनलाइन बिक्री के लिए डालकर न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर के हिंदू समुदाय में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। विशेष रूप से ओडिशा में, जहां भगवान जगन्नाथ को सबसे अधिक श्रद्धा के साथ पूजा जाता है, इस घटना को अत्यंत अपमानजनक माना जा रहा है।

उक्त उत्पाद में भगवान जगन्नाथ का चेहरा एक ऐसे पायदान पर छपा हुआ है जिसे पैर पोंछने के लिए उपयोग किया जाता है। उत्पाद की तस्वीर में एक व्यक्ति को पायदान पर पैर रखते हुए भी दिखाया गया है। उत्पाद विवरण में इसे “moisture absorbent” और “anti-slip” बताया गया है, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के पूर्व सदस्य माधव पुजापांडा ने इस घटनाक्रम को “धार्मिक असहिष्णुता और जानबूझकर किया गया अपमान” बताया। उन्होंने कहा, “मंदिर प्रशासन को तुरंत ओडिशा सरकार और भारत सरकार को इस बारे में सूचित करना चाहिए और इस मुद्दे को राजनयिक स्तर पर चीन के सामने उठाना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “महाप्रसाद, पतितपावन बाना जैसे पवित्र शब्दों और प्रतीकों का भी आजकल धड़ल्ले से व्यावसायिक दुरुपयोग हो रहा है। धार्मिक प्रतीकों की बौद्धिक संपदा सुरक्षा के लिए कानून प्रक्रिया तेज़ करने की ज़रूरत है।” यह खबर वायरल होने के बाद से सोशल मीडिया पर #RespectJagannath और #BoycottAliExpress जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोगों ने अलीएक्सप्रेस और विक्रेता से तुरंत माफी मांगने और उत्पाद को हटाने की मांग की है।

हिंदू संगठनों का कहना है कि भगवान जगन्नाथ केवल एक देवी-देवता नहीं, बल्कि ओडिया अस्मिता और श्रद्धा का प्रतीक हैं। उनकी छवि का इस तरह उपयोग करना आध्यात्मिक और भावनात्मक चोट पहुंचाने जैसा है, और अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स कंपनियों को इस प्रकार की जवाबदेही तय करनी होगी।

विवाद के बीच, यह मांग भी जोर पकड़ रही है कि जगन्नाथ संस्कृति से जुड़े प्रतीकों, छवियों और पवित्र शब्दों को पेटेंट और ट्रेडमार्क के जरिए कानूनी सुरक्षा दी जाए ताकि भविष्य में ऐसे अपमानजनक उत्पाद बाज़ार में न आ सकें। यह केवल एक उत्पाद नहीं, यह एक संप्रदाय और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है। अब देखना यह होगा कि भारत सरकार इस प्रकरण में चीन और अलीएक्सप्रेस से किस तरह जवाब मांगती है।

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