आसाम सरकार ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखते हुए असम–मिज़ोरम सीमा से सटे इलाकों में वन भूमि खाली कराने के लिए बड़ा अभियान चलाया है। 3 फरवरी को हाइलाकांडी ज़िले में चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत 912 एकड़, यानी करीब 2,800 बीघा आरक्षित वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। प्रशासन के अनुसार, यह अभियान शांतिपूर्ण रहा, क्योंकि अधिकांश अवैध कब्जाधारी पहले ही इलाका छोड़ चुके थे।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया मंच X पर जानकारी देते हुए कहा कि हाइलाकांडी में जितनी भूमि खाली कराई गई है, उसका क्षेत्रफल आईआईटी गुवाहाटी के परिसर से भी बड़ा है। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार राज्य की “हर इंच ज़मीन” को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सीएम सरमा ने लिखा, “912 एकड़ IIT गुवाहाटी के कैंपस से भी बड़ा क्षेत्र हाइलाकांडी को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। हमारे बुलडोज़र जैसे ही आगे बढ़े, हमने यह संकल्प दोहराया कि हम अपनी ज़मीन का हर इंच वापस लेंगे। यह हमारे अस्तित्व का सवाल है और हम विजयी होंगे।”
प्रशासन के मुताबिक, यह कार्रवाई घर्मोरा (या घर्मुरा) इनर लाइन रिज़र्व फॉरेस्ट में की गई, जो डामचेरा फॉरेस्ट विलेज क्षेत्र में स्थित है। यहां अवैध रूप से मकान बनाए गए थे और सुपारी सहित अन्य फसलों की खेती की जा रही थी। इस अभियान से 500 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं।
हाइलाकांडी के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर अखिल दत्ता ने बताया कि अतिक्रमण हटाने की करीब 50 प्रतिशत कार्रवाई 2 फरवरी को हुई थी, जबकि शेष कार्य मंगलवार को सेक्टर 1, 2, 3 और 4 में पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि यह पूरा क्षेत्र इनर लाइन रिज़र्व फॉरेस्ट के अंतर्गत आता है, जहां किसी भी तरह की व्यावसायिक या गैर-वन गतिविधि की अनुमति नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया, “सुपारी, कॉफी, चाय या रबर के बागान सभी गैर-वन व्यावसायिक गतिविधियों में आते हैं। आरक्षित वनों में इसकी अनुमति नहीं है। ये गतिविधियां वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का उल्लंघन हैं और इसी वजह से यह कार्रवाई की जा रही है।”
पिछले कुछ वर्षों में असम की भाजपा सरकार ने वन क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों और सरकारी भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की मुहिम तेज की है। सरकार का दावा है कि 2021 से अब तक कुल मिलाकर 40,000 से 42,500 एकड़ से अधिक भूमि को मुक्त कराया जा चुका है।
जनवरी 2026 में बुरहाचापोरी वन्यजीव अभयारण्य में दो दिन का अभियान चलाकर करीब 6,200 बीघा (830 हेक्टेयर) वन भूमि खाली कराई गई थी। इससे पहले फरवरी 2025 में इसी क्षेत्र और आसपास के गांवों में 2,099 हेक्टेयर भूमि से अतिक्रमण हटाया गया था। इसी तरह, जनवरी 2026 में होजाई ज़िले के जमुना–मौडंगा रिज़र्व फॉरेस्ट में 5,250 बीघा भूमि से अवैध कब्जे हटाए गए, जहां प्रशासन के अनुसार बड़ी संख्या में मुस्लिम परिवारों ने खेती के लिए वन भूमि पर कब्जा किया था।
राज्य सरकार का कहना है कि सभी अतिक्रमण विरोधी अभियानों में कानून के तहत प्रक्रिया अपनाई जाती है और पहले से नोटिस जारी किए जाते हैं। सरकार का तर्क है कि ये कदम स्वदेशी अधिकारों, प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए ज़रूरी हैं।
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