आसाम ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में 2025 को एक ऐतिहासिक वर्ष के रूप में दर्ज किया है। राज्य में पूरे साल के दौरान एक भी एक-सींग वाले गैंडे का शिकार नहीं हुआ, जिसे संरक्षण प्रयासों की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस उपलब्धि की जानकारी मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की।
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लिखा, “2025 में शून्य गैंडे का शिकार। आपने सही सुना, 2025 में असम में एक भी गैंडे का शिकार नहीं हुआ, जो हमारे उत्कृष्ट संरक्षण प्रयासों की निरंतरता और आसाम की शान की रक्षा की हमारी श्रृंखला को बनाए रखने को दर्शाता है।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब वन्यजीव संरक्षण को लेकर देश और दुनिया में निगरानी और प्रवर्तन की प्रभावशीलता पर लगातार चर्चा हो रही है।
ZERO RHINOS POACHED IN 2025
You heard it right, ZERO rhinos have been poached in Assam in 2025, continuing our excellent conservation efforts and maintaining our streak of protecting Assam's pride. pic.twitter.com/tOOnNijMOq
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) January 1, 2026
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आसाम इससे पहले 2023 में भी गैंडे के शिकार के शून्य मामले दर्ज कर चुका है। 2025 में यह उपलब्धि दोहराया जाना बताता है कि राज्य में लागू की गई नीतियां और जमीनी स्तर पर किया गया कार्य स्थायी परिणाम दे रहा है।
आसाम की इस सफलता का केंद्र काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान है, जो दुनिया के ग्रेटर वन-हॉर्न्ड राइनो की लगभग 80 प्रतिशत आबादी का घर है। ऐतिहासिक रूप से गैंडे के सींगों की अवैध मांग के कारण यह प्रजाति गंभीर खतरे में रही है। बीते दशकों में अवैध शिकार, खेल शिकार और आवास विनाश ने गैंडों को विलुप्ति के कगार पर पहुंचा दिया था।
आंकड़े बताते हैं कि 1908 में काजीरंगा में केवल 12 गैंडे बचे थे। इसके बाद वैश्विक स्तर पर संरक्षण की अपील और स्थानीय स्तर पर कड़े कदमों के चलते स्थिति में बदलाव आया। असम सरकार द्वारा लागू सख्त निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र, तकनीकी निगरानी, और कुछ क्षेत्रों में शिकारियों के खिलाफ ‘शूट-एट-साइट’ जैसे कठोर प्रावधानों ने अवैध शिकार पर प्रभावी अंकुश लगाया। इसके साथ ही वन विभाग के कर्मियों, स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को भी निर्णायक माना जा रहा है।
आज आसाम में लगभग 4,000 गैंडे पाए जाते हैं, जिनमें से करीब 3,000 काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में हैं। संरक्षण विशेषज्ञों के अनुसार, शून्य शिकार का लक्ष्य केवल प्रवर्तन से नहीं, बल्कि समुदाय-आधारित संरक्षण मॉडल से भी संभव हुआ है, जहां स्थानीय लोग वन्यजीवों की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी रेखांकित करते हैं कि इस उपलब्धि को स्थायी बनाए रखने के लिए निरंतर सतर्कता जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क, आवास पर दबाव और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। इसके बावजूद 2025 में शून्य शिकार का रिकॉर्ड असम के लिए एक मजबूत संकेत है कि सुसंगत नीति, कड़े कदम और सामूहिक प्रयासों से संकटग्रस्त प्रजातियों की प्रभावी रक्षा संभव है।
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