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विधवाओं से जुड़ी कुप्रथाओं पर रोक लगाने के अभियान में जुटे सामाजिक कार्यकर्ता ने की अपील

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विधवाओं से संबंधित भेदभावपूर्ण कुप्रथाओं पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाने के अभियान की अगुवाई कर रहे एक सामाजिक कार्यकर्ता ने गुरुवार को महाराष्ट्र की ग्राम पंचायतों से इस तरह की कुप्रथाओं पर रोक लगाने के अपने कदमों का प्रचार-प्रसार करने की अपील की। प्रमोद जिंजाडे ने अपनी अपील में कहा कि लगभग 7,000 गांवों ने अपनी ग्राम सभाओं के माध्यम से ऐसे प्रस्ताव पारित किए हैं। उन्होंने ऐसे क्षेत्रों को स्वयं को ‘‘ऐसे गांव के रूप में घोषित करने के लिए कहा है, जिन्होंने खुद को विधवाओं से संबंधित कुरीतियों से मुक्त कर लिया है।’’

उन्होंने कहा कि इन गांवों को विधवाओं से संबंधित कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता पैदा करने तथा इस कदम को और बढ़ावा देने के लिए कम से कम पांच सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता संदेश लगाने चाहिए। प्रमोद ने कहा कि जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को जागरूकता की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए पहल करनी चाहिए और ग्राम पंचायतों को आवश्यक निर्देश देना चाहिए। इस साल 17 मई को महाराष्ट्र सरकार ने सभी गांवों को कोल्हापुर जिले में हेरवाड़ की पहल का अनुसरण करने के लिए कहा था, जो इस तरह का प्रस्ताव पारित करने वाला देश का पहला गांव बन गया था।

इस प्रस्ताव में विधवाओं से जुड़ी रस्मों के तहत सिंदूर पोंछने, मंगलसूत्र हटाने और चूड़ियां तोड़ने जैसी प्रथाओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसमें यह भी निर्धारित किया था कि विधवाओं के साथ धार्मिक और सामाजिक कार्यों में भेदभाव नहीं किया जाएगा।   इस साल के शुरूआत में, जिंजाडे ने स्थानीय प्राधिकारियों को एक हलफनामा सौंपा था जिसमें कहा गया था कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी पर ये कुप्रथाएं ना थोपी जाएं।

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