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Friday, March 6, 2026
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मुंबई आ रहे हैं तो एयरपोर्ट पर RT PCR टेस्ट के लिए जेब करनी होगी ढीली

2 सितंबर से मुंबई एयरपोर्ट पर यह नियम किया गया अनिवार्य

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मुंबई। कोरोना के नए वेरिएंट जहां दुनिया भर कहर बरपा रहे हैं। विदेशों से आने वाले मुंबई आने वाले यात्रियों के लिए नई गाइड लाइन जारी की गई है। अब अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों  का कोरोना टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है। इन यात्रियों  को अब एयरपोर्ट पर ही अपने खर्च पर आरटी पीसीआर टेस्ट करना जरूरी कर दिया गया है।

नई गाइडलाइंस के अनुसार 2 सितंबर रात 12 बजे से मुंबई एयरपोर्ट पर यह नियम अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत ब्रिटेन, यूरोप, खाड़ी देशों, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, बांग्‍लादेश, बोत्‍सवाना, चीन, मॉरीशस, न्‍यूजीलैंड, जिम्‍बॉब्‍वे से मुंबई आने वाले प्रत्‍येक यात्री को एयरपोर्ट पर अनिवार्य रूप से कोरोना का आरटी-पीसीआर टेस्‍ट कराना होगा। ब्रिटेन, यूरोप, खाड़ी देश, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, बांग्लादेश, बोत्सवाना, चीन, मॉरीशस, न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे से आने या जाने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्‍ट्रीय एयरपोर्ट पर आने पर अनिवार्य रूप से खुद के खर्च पर आरटी-पीसीआर टेस्‍ट कराना होगा।
पहले पूरी तरह से टीके की दोनों डोज लगवा चुके यात्रियों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के यात्रियों के लिए छूट दी गई थी ,लेकिन अब यह 3 सितंबर से लागू नहीं होगी। ब्रिटेन, यूरोप, खाड़ी देश, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, बांग्लादेश, बोत्सवाना, चीन, मॉरीशस, न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे के यात्रियों को छोड़कर अन्‍य उन सभी यात्रियों, जिन्हें मुंबई हवाई अड्डे से बाहर जाना है या कनेक्टिंग फ्लाइट लेनी है, उन्‍हें नेगेटिव आरटी-पीसीआर रिपोर्ट दिखानी होगी। यह रिपोर्ट यात्रा करने के 72 घंटे पहले की होनी चाहिए।
सभी यात्रियों को मुंबई हवाई अड्डे पर तैनात अधिकारियों को अपना स्व-घोषणा पत्र और वचन पत्र जमा करना होगा और अनिवार्य रूप से 14 दिनों के होम क्वारंटाइन में रहना होगा। मुंबई एयरपोर्ट ने 600 रुपये प्रति टेस्ट की तय दर पर आरटी-पीसीआर जांच की व्यवस्था की है। टेस्‍ट क्षमता को भी प्रति घंटे 600 यात्रियों तक बढ़ाया गया है। बता दें कि हाल ही में विश्व स्वाथ्स्य संगठन ने नए वेरिएंट के बारे में बताया है जो बहुत ही घातक है। संगठन के अनुसार इस वेरिएंट का नाम म्यू है।
B 1.621 वेरिएंट पहली बार जनवरी में पाया गया था। इस वेरिएंट से जुड़े चार हजार केस आ चुके हैं और यह 40 से ज्यादा देशों में पाया गया है। संगठन का कहना है कि यह वेरिएंट वैक्सीन को भी बेअसर कर सकता है। इसकी गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए।
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