सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने और उन्हें ऑनलाइन खतरों से सुरक्षित रखने के लिए सख्त नियम बनाने की मांग वाली एक याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा गया है और अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी।
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में एमरल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल और इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से सुरक्षित रखना केंद्र और राज्य सरकारों की संवैधानिक जिम्मेदारी है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि सोशल मीडिया के बहुत ज़्यादा इस्तेमाल से बच्चों की मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर बुरा असर पड़ रहा है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, सोशल मीडिया के बिना कंट्रोल के इस्तेमाल से बच्चों में डिप्रेशन, एंग्जायटी, चिंता, इमोशनल परेशानी और कॉन्फिडेंस की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए, उन्होंने कहा है कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाना एक प्रैक्टिकल ऑप्शन है।
इसके अलावा, पिटीशन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स द्वारा बच्चों के बिहेवियर से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने और उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा समय तक ऑनलाइन एंगेज रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डिज़ाइन तरीकों पर भी चिंता जताई गई है। इन खतरों के नतीजे तुरंत दिखाई नहीं देते हैं। अक्सर, पिटीशनर्स ने तर्क दिया है कि जब तक उनके पेरेंट्स या टीचर्स को इसका एहसास होता है, तब तक बच्चे बहुत बड़ा नुकसान उठा चुके होते हैं। पिटीशन में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का ज़्यादा इस्तेमाल बच्चों की मेंटल और फिजिकल हेल्थ के लिए कई तरह की मुश्किलें खड़ी कर रहा है।
इस बारे में कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह दावा किया गया है कि लगभग 37 परसेंट बच्चे डिप्रेशन, एंग्जायटी या साइबरबुलिंग जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया के इस्तेमाल से 12 से 13 साल के बच्चों में एंग्जायटी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। अब ध्यान इस बात पर है कि बच्चों की ऑनलाइन सेफ्टी के लिए सख्त नियम बनाने की मांग वाली इस पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला लेता है, साथ ही केंद्र सरकार अपने जवाब में क्या बात रखती है। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है, लेकिन बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने पर अभी कोई आखिरी फैसला नहीं लिया गया है।
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