इथियोपिया में करीब दस हज़ार साल बाद हुए विशाल ज्वालामुखी विस्फोट ने अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात को प्रभावित कर दिया है। इसका पहला बड़ा असर सोमवार (24 नवंबर)को तब देखने को मिला जब कन्नूर से अबू धाबी जा रही IndiGo की फ्लाइट 6E 1433 को अचानक अहमदाबाद में उतारना पड़ा। एयरलाइन ने बताया कि विमान सुरक्षित रूप से उतरा और यात्रियों की सुरक्षा के लिए उसके बाद कन्नूर के लिए एक विशेष वापसी सेवा संचालित की जाएगी।
यह विस्फोट इथियोपिया के एर्टा एले पर्वत श्रृंखला में स्थित हैली गुब्बी ज्वालामुखी में रविवार सुबह हुआ, जिसे वैज्ञानिक ‘हज़ारों वर्षों में होने वाली असाधारण घटना’ बता रहे हैं। टूलूज़ वोल्कैनिक ऐश एडवाइजरी सेंटर की सैटेलाइट रिपोर्ट के अनुसार ज्वालामुखी से उठने वाला राख और सल्फर डाइऑक्साइड का गुबार 10 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया और पूर्व दिशा में रेड सी पार करते हुए ओमान और यमन तक फैल गया। कई क्षेत्रों में पर्यावरण और एविएशन एडवाइजरी जारी किए गए हैं।
भारत में इसके प्रभाव को लेकर सबसे अधिक चिंता उस राख के बादल को लेकर है जो हवा के रुख के साथ उत्तर की ओर बढ़ रहा है। भारतीय विमानन नियामक और मौसम विभाग इसकी दिशा और घनत्व का लगातार विश्लेषण कर रहे हैं, क्योंकि यह वही ऊंचाई है जिस पर अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक विमान उड़ते हैं। अधिकारियों के अनुसार सोमवार शाम से दिल्ली और जयपुर के हवाई मार्गों पर संभावित प्रभाव की आशंका को देखते हुए कुछ उड़ानों ने वैकल्पिक रास्ते अपनाने शुरू कर दिए हैं।
इसी बीच अकासा एयर ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हालात की लगातार समीक्षा कर रही है और यात्रियों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि ज्वालामुखीय राख इंजन, विंडशील्ड और नेविगेशन सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए समय पर डाइवर्ज़न और रीरूटिंग जरूरी कदम हैं।
ओमान की पर्यावरण प्राधिकरण ने संभावित वायु गुणवत्ता के खतरे को लेकर सतर्कता जारी की है, हालांकि उसके 68 मॉनिटरिंग स्टेशन अब तक हवा में कोई खतरनाक वृद्धि दर्ज नहीं कर पाए हैं। अधिकारियों ने लोगों से ‘नक़ी’ प्लेटफ़ॉर्म पर वास्तविक वायु गुणवत्ता अपडेट देखने की अपील की है।
हैली गुब्बी का यह दुर्लभ विस्फोट दूरस्थ क्षेत्र में होने के बावजूद वैश्विक उड़ान मार्गों के लिए एक गंभीर चेतावनी बन गया है। भारतीय एविएशन सेक्टर फिलहाल एहतियात के मोड में है, और स्थिति सामान्य होने तक विमानों के रूट में अस्थायी बदलाव संभव हैं।
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