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Thursday, October 22, 2026
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सिंधु जल संधि निलंबन के बाद सरकार ने चेनाब पर तेज़ की सावलकोट बांध परियोजना

सावलकोट जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 5,129 करोड़ रुपये का टेंडर जारी

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पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर एक प्रमुख जलविद्युत परियोजना को तेज़ी से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इस दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) ने रम्बन जिले में प्रस्तावित सावलकोट जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए 5,129 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है।

चेनाब नदी पर प्रस्तावित यह परियोजना 1,856 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाली है और इसे क्षेत्र की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। सरकार के व्यापक दृष्टिकोण के तहत इस परियोजना को भारत के हिस्से के जल संसाधनों के इष्टतम उपयोग की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक हालात में बदलाव आ रहे हैं।

NHPC द्वारा जारी टेंडर के अनुसार, बोली प्रक्रिया 12 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च तक चलेगी। टेंडर शर्तों के मुताबिक, जमा की गई बोलियां 180 दिनों तक वैध रहेंगी। परियोजना के लिए कुल निर्माण अवधि 3,285 दिन तय की गई है, जो यह संकेत देती है कि यह एक दीर्घकालिक अवसंरचना परियोजना होगी और इसके निर्माण में कई वर्ष लग सकते हैं। इस पैकेज में बांध, सुरंगों और संबंधित अन्य संरचनाओं का निर्माण शामिल है।

सावलकोट जलविद्युत परियोजना पर वर्षों से विचार किया जा रहा था, लेकिन हालिया घटनाक्रम के बाद इसे नई गति मिली है। अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के पूरा होने से जम्मू-कश्मीर की बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और राष्ट्रीय ग्रिड को भी मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही, रम्बन जिले में रोज़गार के अवसर पैदा होने और स्थानीय अवसंरचना विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि भारत ने पिछले साल अप्रैल में पाकिस्तान के साथ 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। यह कदम पहलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, के बाद इस्लामाबाद के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के रूप में उठाया गया। इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव में तीव्र वृद्धि देखी गई थी।

1960 में हुई इस संधि के तहत, भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त है, जबकि पश्चिमी नदियों में सिंधु, झेलम और चेनाब  का अधिकांश जल पाकिस्तान को मिलता है। हालांकि, संधि के प्रावधानों के अनुसार, भारत को पश्चिमी नदियों पर भी सीमित उपयोग अधिकार प्राप्त हैं, जिनमें जलविद्युत परियोजनाएं शामिल हैं।

नीतिगत स्तर पर सावलकोट परियोजना को भारत की ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय विकास और जल संसाधन प्रबंधन से जोड़कर देखा जा रहा है। मौजूदा परिस्थितियों में इस परियोजना को तेज़ी से आगे बढ़ाना केंद्र की रणनीतिक प्राथमिकताओं में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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