भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6 फरवरी को समाप्त सप्ताह में 6.711 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर 717.064 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार (14 फरवरी) को जारी आंकड़ों में दी। पिछले सप्ताह देश का फॉरेक्स रिजर्व 14.361 अरब डॉलर बढ़कर 723.774 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था, लेकिन लगातार चार सप्ताह की बढ़त के बाद अब इसमें गिरावट दर्ज की गई है। दौरान सोने की कीमतें गिरने से गोल्ड रिजर्व में भी गिरावट देखी गई, जिस पर बिना ठोस तथ्य परिक्षण के सोने के गायब होने की बातें उड़ाई गई।
RBI के अनुसार, 6 फरवरी को समाप्त सप्ताह में कुल भंडार 6.711 अरब डॉलर घटा। इससे पहले चार हफ्तों में कुल 36.97 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी। जानकारों का मानना है कि यूरोपीय संघ (EU) और उसके बाद अमेरिका (US) के साथ ट्रेड डील के बाद भंडार में मजबूती आई थी, जिसके बाद अब आंशिक गिरावट देखी गई है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में बड़ी गिरावट आई है। गोल्ड होल्डिंग घटकर 123.476 अरब अमेरिकी डॉलर रह गई। इसमें 14.208 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई। रुपये में देखें तो यह करीब 1.29 लाख करोड़ रुपये की गिरावट के बराबर है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आई तेज गिरावट है, जिससे सरकारी खजाने में रखे सोने का मूल्यांकन कम हुआ।
इस बीच पंजाब केसरी के रिपोर्ट में सोना “गायब” होने जैसे दावे किया गया था, जिसे प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) ने फैक्ट चेक कर उन्हें फर्जी बताया।
कुल भंडार का प्रमुख हिस्सा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां (FCA) हैं, 7.661 अरब डॉलर बढ़कर 570.053 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इससे पहले वाले सप्ताह में इनमें 493 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। पिछले छह हफ्तों में तीन बार FCA में गिरावट देखी गई है, जबकि अन्य हफ्तों में बढ़त दर्ज हुई।
6 फरवरी: +7.661 अरब डॉलर
30 जनवरी: –0.493 अरब डॉलर
23 जनवरी: +2.367 अरब डॉलर
16 जनवरी: +9.652 अरब डॉलर
9 जनवरी: –1.124 अरब डॉलर
2 जनवरी: –7.622 अरब डॉलर
आरबीआई ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति बैठक में स्पष्ट किया है कि भारत का बाहरी क्षेत्र मजबूत स्थिति में है। मौजूदा 717.064 अरब डॉलर का भंडार 11 महीने से अधिक के आयात खर्च को कवर करने में सक्षम है।
साल 2025 में अब तक विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 56 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। 2024 में यह वृद्धि 20 अरब डॉलर से अधिक रही। 2023 में भारत ने 58 अरब डॉलर जोड़े थे, जबकि 2022 में 71 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई थी।
कुल मिलाकर, रिकॉर्ड ऊंचाई से 6.7 अरब डॉलर की गिरावट भले ही बड़ी लगे, लेकिन मजबूत आयात कवर और FCA में वृद्धि यह संकेत देती है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी स्थिर और सुदृढ़ स्थिति में है।
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