प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रों आज (17 फरवरी) मुंबई से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कर्नाटक के वेमगल में टाटा-एयरबस H125 हेलीकॉप्टर फाइनल असेंबली लाइन (FAL) का उद्घाटन करेंगे। यह भारत के आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत निजी क्षेत्र द्वारा स्थापित पहला हेलीकॉप्टर असेंबली प्लांट है, जिसे देश के एयरोस्पेस विनिर्माण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
यह अत्याधुनिक संयंत्र टाटा एडवांस्ड सिस्टम लिमिटेड (TASL) और एयरबस के संयुक्त उपक्रम के रूप में स्थापित किया गया है। वेमगल स्थित यह सुविधा क्षेत्र के मजबूत एयरोस्पेस इकोसिस्टम और प्रशिक्षित मानव संसाधन का लाभ उठाएगी।
इस संयंत्र में एयरबस H125 हेलीकॉप्टर का निर्माण किया जाएगा, जो दुनिया का सबसे अधिक बिकने वाला सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टर है और अत्यधिक ऊंचाई तथा कठिन परिस्थितियों में प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। H125 एकमात्र हेलीकॉप्टर है जिसने माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की है। ऊँचे और गर्म वातावरण में संचालन की इसकी क्षमता इसे लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे उच्च-ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है।
पहला मेड इन इंडिया H125 हेलीकॉप्टर 2027 की शुरुआत तक तैयार होकर ग्राहकों को सौंपे जाने की उम्मीद है। टाटा के प्लांट में असेंबली, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल सिस्टम का एकीकरण, परीक्षण और अंतिम उड़ान परीक्षण तक की पूरी प्रक्रिया TASL द्वारा संभाली जाएगी।
हालांकि प्राथमिक फोकस नागरिक उपयोग पर रहेगा, लेकिन भविष्य में H125 का सैन्य संस्करण H125M भी तैयार करने की योजना है, जिसमें उच्च स्तर की स्वदेशी तकनीक शामिल होगी। इसका उद्देश्य भारतीय सशस्त्र बलों की हल्के मल्टी रोल हैलीकॉप्टर्स की आवश्यकताओं को पूरा करना है।
यह प्लांट न केवल घरेलू मांग को पूरा करेगा, बल्कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र के अन्य देशों को निर्यात की भी संभावना रखता है। यह टाटा और एयरबस की दूसरी संयुक्त असेंबली लाइन है; इससे पहले दोनों ने गुजरात के वडोदरा में C295 सैन्य परिवहन विमान निर्माण सुविधा स्थापित की है।
आर्थिक दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है। एयरबस पहले से ही भारत से हर वर्ष 1.4 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के पुर्जे और सेवाएं प्राप्त करता है, जिससे हजारों स्थानीय रोजगार सृजित होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह नई हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन भारत को वैश्विक एयरोस्पेस आपूर्ति श्रृंखला में और मजबूत स्थान दिला सकती है।
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